नगर पंचायत और एनएच विभाग के बीच जिम्मेदारी का विवाद, दो साल से अटका निर्माण कार्य, गौरव पथ भी जर्जर
चंद्रपुर (रायगढ़)। महानदी किनारे बसा चंद्रपुर, जहां प्रसिद्ध चंद्रहासिनी देवी मंदिर स्थित है, आज बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को लेकर चर्चा में है। यहां कोतरी नाला पर बना पुराना पुल स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए लगातार परेशानी का कारण बन गया है।
संकरा पुल बना जाम और दुर्घटना का बड़ा कारण
कोतरी नाला पर स्थित पुराना पुल बेहद संकरा है, जहां से दो कारें तो किसी तरह गुजर सकती हैं लेकिन भारी वाहन एक साथ नहीं निकल पाते। पुल की रेलिंग भी कई जगह टूट चुकी है, जिससे सुरक्षा जोखिम और बढ़ गया है। पुल के दोनों ओर लगभग 30 से 40 फुट गहरी खाई होने के कारण किसी भी दुर्घटना की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।
नगर पंचायत और पीडब्ल्यूडी के बीच जिम्मेदारी का विवाद
पुल निर्माण को लेकर नगर पंचायत और पीडब्ल्यूडी एनएच विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर टकराव बना हुआ है। नगर पंचायत का कहना है कि पुल एनएच के अंतर्गत आता है, इसलिए निर्माण कार्य एनएच विभाग को करना चाहिए। वहीं पीडब्ल्यूडी एनएच का दावा है कि पुल को नगर पंचायत को हैंडओवर किया जा चुका है, इसलिए निर्माण की जिम्मेदारी उन्हीं की है।
इसी खींचतान में पिछले दो वर्षों से निर्माण कार्य अटका हुआ है, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है।
भारी वाहनों से रोजाना जाम की स्थिति
बायपास मार्ग न होने के कारण सभी भारी वाहन चंद्रपुर शहर के अंदर से गुजरते हैं, जिससे कोतरी नाला पुल पर अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। किसी वाहन के फंसने पर दोनों ओर लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाती है।
गौरव पथ की हालत भी खराब, लोकार्पण से पहले ही जर्जर
चंद्रपुर को विकसित करने के लिए बनाए गए गौरव पथ की स्थिति भी बेहद खराब है। 1.8 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क धंस चुकी है और कांक्रीट उखड़ गया है। डिवाइडर पर लगी लोहे की रेलिंग चोरी हो चुकी है, जबकि पेवर ब्लॉक भी जगह-जगह उखड़ गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार लोकार्पण से पहले ही गौरव पथ की हालत जर्जर हो चुकी है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विकास कार्यों की धीमी गति से बढ़ी नाराजगी
स्थानीय लोगों में निर्माण कार्यों की धीमी गति और विभागीय विवाद को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि समय पर बायपास और पुल का निर्माण हो जाता, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।















































