Project SAHAS : नवीन जिन्दल फाउंडेशन ने शुरू किया ‘प्रोजेक्ट साहस’, बंदियों के पुनर्वास और विकास पर रहेगा फोकस

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स्वास्थ्य, आत्मबल, हुनर, अधिकार और सम्मान के पांच स्तंभों के जरिए बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल

कैथल। नवीन जिन्दल फाउंडेशन द्वारा एक निजी प्रतिष्ठान में ‘प्रोजेक्ट साहस’ का पोस्टर जारी कर अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह पहल कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र की जेलों में बंद बंदियों के समग्र विकास, सुधार और पुनर्वास को समर्पित है।

बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल

कार्यक्रम में प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर शुभम ऐरी ने परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि Project SAHAS के माध्यम से बंदियों को स्वास्थ्य, आत्मबल, हुनर, अधिकार और सम्मान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बंदियों के भीतर आत्मविश्वास, कौशल और सकारात्मक सोच का विकास करना है, ताकि सजा पूरी होने के बाद वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

सुधार और पुनर्वास को दी जाएगी प्राथमिकता

कार्यक्रम में सांसद श्री नवीन जिन्दल के कैथल कार्यालय प्रभारी रविन्द्र धीमान एवं आवेश सिंह ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए सांसद के विजन को साझा किया।

उन्होंने कहा कि समाज में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है, जब सुधार और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाए। प्रोजेक्ट साहस इसी सोच को आगे बढ़ाने वाली पहल है, जो बंदियों को आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनने में सहायता करेगी।

पांच स्तंभों पर आधारित है प्रोजेक्ट साहस

प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर शुभम ऐरी ने कहा कि यह अभियान पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—

  • स्वास्थ्य
  • आत्मबल
  • हुनर
  • अधिकार
  • सम्मान

इनके माध्यम से बंदियों को समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापना का अवसर प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।

समाज में नई उम्मीद जगाने का प्रयास

रविन्द्र धीमान ने कहा कि सांसद श्री नवीन जिन्दल का विजन है कि हर व्यक्ति को जीवन में दूसरा अवसर मिलना चाहिए। प्रोजेक्ट साहस इसी मानवीय सोच का विस्तार है, जो बंदियों को सुधार, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाएगा।

वहीं आवेश सिंह ने कहा कि यह पहल केवल कारागार सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का अभियान है। इससे बंदियों को नई उम्मीद मिलेगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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