रायपुर। सूर्य, देव इन दिनों अपने पूरे तेज और ताप के साथ धरती की परीक्षा ले रहे हैं। 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच झूलता तापमान शरीर से, पसीने की धाराएं बहा दे रहा है। तपती दोपहर, और झुलसा देने वाली गरम हवाओं के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गांव-गांव की खाक छानते हुए जनता के बीच पहुंच रहे हैं। अवसर है ‘सुशासन तिहार’ का, जिसे गत 1 मई से 40 दिनों तक चलाने की तैयारी छत्तीसगढ़ सरकार ने की है। इस अभियान के माध्यम से मुख्यमंत्री की कोशिश है कि जनता से सीधे संवाद कर यह जाना जाए कि शासन-प्रशासन का तंत्र जमीनी स्तर पर किस तरह काम कर रहा है।
लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता के प्रति जवाबदेही निभाने और उनकी सहूलियतों के लिए आवश्यक कदम उठाने की होती है। इसी कसौटी पर अपनी सरकार को परखने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनकी पूरी टीम लगातार प्रदेश प्रवास पर हैं। इस अभियान के दौरान वे अब तक लगभग पंद्रह जिलों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों में उन्हें क्या अनुभव हुए? किन शिकायतों और समस्याओं से वे रूबरू हुए? और किन व्यवस्थाओं तथा जनसहभागिता ने उन्हें संतोष और आनंद का अनुभव कराया? इन्हीं तमाम मुद्दों पर हमने उनसे विस्तार से खास बातचीत की।
चिरमिरी के विश्रामगृह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से हुई इस खुली चर्चा के प्रमुख अंश प्रस्तुत हैं:
▶ सुशासन का संकल्प था। रायपुर में बैठकर भी आप समीक्षा कर ही लेते थे। क्या जरूरत आन पड़ी है आपको, जो ऐसी गर्मी में चले हैं गांव-गांव, डगर-डगर, नगर-नगर? क्या सोच है इसके पीछे? चुनाव में तो अभी बहुत समय बाकी है।
देखिए, सुशासन तिहार का यह दूसरा साल है और इस साल 1 मई से इसका शुभारंभ हुआ है, जो 10 जून तक चलने वाला है। इसका उद्देश्य यही है कि हम लोगों के बीच जाएं, गांव में जाएं और जो सरकार की योजनाएं हैं, जो मोदी की गारंटी है, वह कहां तक लोगों तक पहुंच रही है। राशन उन तक हर महीना नियमित पहुंच रहा है कि नहीं, पेयजल की व्यवस्था उनके लिए है कि नहीं; बिजली रहती है कि नहीं, स्कूल में गुरुजी पढ़ाने आते हैं। कि नहीं; पटवारी वहां रहता है कि नहीं, ये फील्ड में जाने से, गांव के लोगों के बीच में जाने से इसकी वास्तविकता पता चलती है। और हम एक सुशासन भी देना चाहते हैं और इसलिए जरूरी हो जाता है कि सुशासन तिहार के माध्यम से हम जनता के बीच में जाएं।
▶ आपने नाम दिया ‘सुशासन’। लोगों को शासन के संदर्भ में ठीक-ठाक तरीके से काम हो जाए, इसके लिए दिक्कत रहती है। आपने कुछ ज्यादा उम्मीद तो नहीं पाल ली? आपने सुशासन नाम दिया, लोगों की उम्मीद ज्यादा तो नहीं जगा दी? किस अनुभव से गुजरते हैं विष्णुदेव साय जब लोगों के बीच जाते हैं? जो आपकी परिकल्पना थी, वैसा अधिकारी और नेता बर्ताव कर रहे हैं या अभी आप अपनी मंजिल से बहुत दूर महसूस कर रहे हैं?
देखिए, एक तो पिछली जो कांग्रेस की सरकार थी, उस सरकार को छत्तीसगढ़ की जनता ने बड़ा जनादेश दिया था। उन्होंने 36 वादे भी किए थे, लेकिन 5 साल पूरा उनको सरकार चलाने का अवसर मिला, उसके बावजूद उन्होंने जनता के विश्वास को तोड़ा। जनता के विश्वास में खरा नहीं उतरे, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार को और कुशासन को बहुत बढ़ावा दिए और इसीलिए अगले चुनाव में छत्तीसगढ़ की जनता ने उन्हें शासन से उखाड़ के फेंक दिया। हमने पहले तो जनता का विश्वास अर्जित करने का प्रयास किया और जो मोदी की गारंटी के काम थे, उसको हम लोग बहुत कम समय में जनता के बीच में पहुंचाए, तो इससे सरकार के प्रति जनता का विश्वास बना। वैसे भी आज पूरे देश की जनता का विश्वास बीजेपी में और हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में बढ़ा है और इसलिए लगातार हर चुनाव में, हर प्रदेश के चुनाव में, चाहे विधानसभा हो, चाहे नगरीय निकाय का हो, चाहे लोकसभा का हो, हर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अच्छी सफलता मिल रही है।
▶इस बार भी सुशासन तिहार पर निकले हैं। पिछली बार के मुकाबले क्या अंतर दिख रहा है?
पिछले साल ज्यादा समस्याएं आई थीं, हालांकि उसका भी सरकार की तरफ से निदान हुआ। उसके बनिस्बत इस बार कम समस्याएं आ रही हैं और चूंकि कलेक्टरों को भी हिदायत थी अप्रैल महीने में कि आप लोग अपने-अपने जिले में पुराने-पुराने केस पेंडिंग रहते हैं उसको आप लोग निपटाएं। जब समीक्षा बैठक कर रहे हैं तो जानकारी मिल रही है, सैकड़ों-हजारों की संख्या में पुराने राजस्व के केस निपट रहे हैं। समाधान शिविर में भी जो जा रहे हैं और खुद पूछ भी रहे हैं गांव में, तो उनके यहां बहुत सारी सुविधाएं उनको उपलब्ध हो रही हैं, चाहे वह राशन का मामला हो, चाहे बिजली बिल का मामला हो, चाहे पेयजल की व्यवस्था हो, स्वस्थ हो, चिकित्सा हो तो यह सब उन तक पहुंच पा रहा है। तो यह मतलब पिछले समय से इस समय के सुशासन तिहार में अंतर देखने को मिला है।
▶ लोग पानी के संकट को लेकर बार-बार आपसे गुहार कर रहे हैं कई जगहों पर। तो बड़ा अचरज होता है जब जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना देश भर में लागू हुई, मोदी जी ने कहा था हर घर नल से जल और उसके तहत हजारों करोड़ रुपया छत्तीसगढ़ को भी मिला, फिर भी लोग पीने के पानी के लिए अभी भी परेशान हैं। क्या महसूस करते हैं, कहां चूक गए हम?
देखिए, एक तो जब 15 साल बीजेपी की सरकार थी तो पर्याप्त मात्रा में हैंडपंप भी खोदे, जल आवर्धन योजना से लेकर यह सब योजना भी चली। और बाद में यह सौभाग्य हुआ कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने जिस तरह से उनका संकल्प था कि हर घर में बिजली हो, हर घर में बैंक का खाता हो, हर घर में शौचालय हो, उसी तरह से हर घर में पाइप द्वारा पानी भी पहुंचे। लेकिन पिछली जो यहां की कांग्रेस की सरकार थी, उस योजना को ठीक से लागू नहीं की और वह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। अगर उनकी सरकार के समय यह काम सही होता, तो हम समझते हैं कि आज इतनी पेयजल की समस्या नहीं होती। लेकिन हम लोग सरकार में आने के बाद काफी संभालने का प्रयास किया है, स्टेट बजट से भी राशि दी है। चूंकि आजकल वाटर लेवल भी काफी डाउन हो रहा है, तो हैंडपंप वगैरह भी सूखते चले जा रहे हैं। उसके लिए भी हम लोग उपाय कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने जल जीवन मिशन 20 फिर से प्रारंभ किया है, उससे पैसे मिलेंगे तो निश्चित रूप काम और होगा।
▶सुशासन तिहार में नक्सल मोर्चे पर मिली सफलता किस तरीके से जाहिर हो रही है? लोगों के बीच में इसका कोई रिएक्शन है?
देखिए, इसकी तो जहां भी जा रहे हैं, प्रशंसा हो रही है प्रदेश सरकार की और भारत सरकार की। क्योंकि यह समस्या ऐसी समस्या थी, यह तो राष्ट्रीय समस्या थी और बड़ी तादाद में हमारे छत्तीसगढ़ में यह समस्या बची थी। ऐसा लगता था लोगों को कि पता नहीं कभी इसका मतलब निदान होगा भी कि नहीं, कि ऐसे ही बस्तर के लोग विकास से अछूते रहेंगे। लेकिन जब डबल इंजन की सरकार बनी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद मिला और हमारे देश के गृह मंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति हुई, और हमारे जवानों का अदम्य साहस के कारण, उस क्षेत्र की जनता का समर्थन भी मिला क्योंकि वे लोग नक्सलवाद से मुक्ति चाहते थे। इस असंभव से काम को संभव करने में हम लोग कामयाब हुए, तो इसकी सर्वत्र तारीफ हो रही है।















































