रायपुर में नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां इंदौर से सप्लाई कर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में दवाएं खपाई जा रही थीं। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे रैकेट पर बड़ी कार्रवाई की है।
इंदौर से संचालित था नकली दवाओं का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि यह रैकेट इंदौर से संचालित हो रहा था। वहां से नकली दवाओं की खेप छत्तीसगढ़ भेजी जाती थी, जिन्हें सारंगढ़ और भाठापारा के मेडिकल स्टोर्स के जरिए बाजार में बेचा जा रहा था। गोगांव स्थित ट्रांसपोर्ट में बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
छापेमारी के बाद मेडिकल स्टोर्स पर कसा शिकंजा
मामले के उजागर होने के बाद ड्रग विभाग ने सारंगढ़ और भाठापारा के कई मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी की। जांच में पुष्टि हुई कि इन दुकानों के जरिए नकली दवाओं को बाजार में बेचा जा रहा था, जिससे आम लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था।
वायरल वीडियो के बाद अधिकारी निलंबित
जनवरी में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया। वीडियो में एक मेडिकल स्टोर संचालक और सहायक औषधि नियंत्रक संजय कुमार नेताम के बीच संदिग्ध मुलाकात सामने आई थी। इसके बाद विभाग ने संजय कुमार नेताम को निलंबित कर जांच शुरू कर दी।
तीन आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक रिमांड पर भेजे गए
पुलिस ने इंदौर से सप्लाई करने वाले रोचक अग्रवाल, सारंगढ़ के खेमराम बानी और भाठापारा के सुरेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है। तीनों को कोर्ट में पेश कर 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पूरे नेटवर्क के खुलासे की संभावना
पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त जांच जारी है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह रैकेट काफी बड़ा हो सकता है और इसमें अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब सप्लाई चेन के हर लिंक को खंगाल रही हैं।















































