Iran-Israel War Ceasefire: 40 दिन बाद थमा युद्ध, 650 मिसाइल हमलों और हजारों एयर स्ट्राइक से तबाही का बड़ा खुलासा

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नई दिल्ली। Israel, Iran और United States के बीच जारी 40 दिन लंबा संघर्ष आखिरकार बुधवार को सीजफायर के साथ थम गया। इस युद्ध ने भारी तबाही और नुकसान छोड़ा है, जिसमें मिसाइल हमलों और जवाबी एयर स्ट्राइक के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले सामने आए हैं।

650 बैलिस्टिक मिसाइलों से दहला इजरायल, आबादी वाले इलाकों पर बड़ा खतरा
इजरायली सेना के अनुसार, युद्ध के दौरान ईरान ने इजरायल पर करीब 650 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें से आधे से ज्यादा मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे थे, जो बड़े इलाके में अंधाधुंध विस्फोट करते हैं।
कम से कम 16 मिसाइलें सीधे आबादी वाले क्षेत्रों में गिरीं, जिससे भारी नुकसान हुआ। वहीं करीब 50 घटनाओं में क्लस्टर बम से लैस मिसाइलों के वारहेड रिहायशी इलाकों में गिरे।

हजारों घायल, कई मौतें और हजारों लोग बेघर
मिसाइल हमलों में कम से कम 20 इजरायली और विदेशी नागरिकों की मौत हुई, जबकि वेस्ट बैंक में 4 फिलिस्तीनी भी मारे गए। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 7,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
इन हमलों के कारण 5,500 से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए।

युद्ध की शुरुआत और लगातार मिसाइल हमले
जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके जवाब में ईरान ने पहले ही दिन करीब 80 मिसाइलें दागीं, दूसरे दिन 60 और तीसरे दिन 30 मिसाइलें छोड़ीं। इसके बाद सीजफायर तक रोजाना औसतन 10–20 मिसाइल हमले जारी रहे।

इजरायल का जवाब: 10,800 से ज्यादा एयर स्ट्राइक
इजरायल ने भी जोरदार जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान पर 10,800 से अधिक हवाई हमले किए। इन हमलों में 18,000 से ज्यादा बम गिराए गए और 4,000 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इनमें मिसाइल लॉन्चर, हथियार निर्माण इकाइयां, परमाणु सुविधाएं और सैन्य मुख्यालय शामिल थे।

ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान
इजरायली सेना का दावा है कि ईरान के लगभग 470 बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों में से करीब 60% को नष्ट या निष्क्रिय कर दिया गया।
इसके अलावा 300 से ज्यादा हवाई रक्षा सिस्टम और रडार को भी निशाना बनाया गया, जिससे ईरान की लगभग 85% एयर डिफेंस क्षमता प्रभावित हुई है।

सीजफायर के बाद भी तनाव बरकरार
हालांकि 40 दिन बाद युद्धविराम लागू हो गया है, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष के दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं और आने वाले समय में हालात फिर से बिगड़ सकते हैं।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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