₹49 लाख खर्च के बाद भी नहीं मिली फ्लाइट: बेंगलुरु एयरपोर्ट पर रोका गया परिवार, मामला कोर्ट पहुंचा

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बेंगलुरु, 15 अप्रैल 2026 विदेश यात्रा का सपना एक परिवार के लिए उस समय बुरे अनुभव में बदल गया, जब लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद उन्हें एयरपोर्ट पर फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया। मामला अब अदालत तक पहुंच गया है, जहां एयरलाइन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।


₹49 लाख की टिकट, फिर भी नहीं मिली बोर्डिंग

तमिलनाडु के सलेम निवासी J. S. Satishkumar अपने परिवार के 7 सदस्यों के साथ पेरू यात्रा पर जा रहे थे। उन्होंने KLM Royal Dutch Airlines की बिजनेस क्लास की 8 टिकटें करीब ₹49 लाख में बुक की थीं।
परिवार समय पर Kempegowda International Airport पहुंचा और सभी औपचारिकताएं पूरी कर लीं, लेकिन बोर्डिंग के समय उन्हें रोक दिया गया।


वीजा को लेकर विवाद, एयरलाइन पर नियमों की गलत व्याख्या का आरोप

एयरलाइन स्टाफ ने परिवार को यह कहते हुए रोक दिया कि उनके पास पेरू का वीजा नहीं है।
वहीं सतीशकुमार का दावा है कि भारतीय पासपोर्ट धारकों को यदि अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया या शेंगेन देशों का वैध वीजा हो, तो पेरू के लिए अलग वीजा की आवश्यकता नहीं होती। इसी मुद्दे पर विवाद गहरा गया।


अदालत ने FIR के दिए निर्देश

घटना के बाद मामला अदालत पहुंचा, जहां कर्नाटक की कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए एयरलाइन के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर उन्हें “रेड फ्लैग” कर दिया गया, जिसके चलते बाद में विदेश यात्रा के दौरान सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में भी पूछताछ का सामना करना पड़ा।


एयरलाइन का पक्ष: नियमों के पालन की बात

KLM Royal Dutch Airlines ने अपने पक्ष में कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय यात्रा नियमों का पालन करती है और यात्रियों के पास सही दस्तावेज होना अनिवार्य है। हालांकि, कंपनी ने घटना पर खेद भी जताया है।


यात्रियों के अधिकार और नियमों पर उठे सवाल

इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय यात्रा नियमों, वीजा गाइडलाइन की स्पष्टता और एयरलाइंस की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रियों को यात्रा से पहले नियमों की पूरी जानकारी लेना जरूरी है, वहीं एयरलाइंस को भी स्पष्ट और सटीक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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