रायपुर में एनालॉग पनीर पर सख्ती के बावजूद कारोबार जारी, खाद्य विभाग के लिए बनी बड़ी चुनौती

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रायपुर। मिल्क पाउडर और पाम ऑयल से तैयार किए जा रहे एनालॉग पनीर का कारोबार राज्य में लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के लिए यह एक गंभीर चुनौती बन गया है। सालभर में करीब 10 हजार किलो से अधिक एनालॉग पनीर जब्त किए जाने के बावजूद इसकी बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।


लगातार कार्रवाई के बाद भी बाजार में सप्लाई जारी

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम समय-समय पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में एनालॉग पनीर जब्त कर रही है, लेकिन कुछ ही समय बाद फैक्ट्रियां फिर से सक्रिय हो जाती हैं। अधिकारियों के अनुसार यह एक संगठित सप्लाई नेटवर्क के रूप में काम कर रहा है, जिसमें सस्ते कच्चे माल से तैयार यह उत्पाद तेजी से बाजार में खप रहा है।


असली पनीर के बजाय सस्ता विकल्प बन रहा एनालॉग

विशेषज्ञों के अनुसार असली पनीर दूध से बनाया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर मिल्क पाउडर, वनस्पति तेल और साइट्रिक एसिड से तैयार किया जाता है। सस्ता होने के कारण यह होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट में अधिक उपयोग हो रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसके अधिक सेवन से हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल और पाचन संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।


कई बार हुई बड़ी जब्ती, फिर भी फैक्ट्रियां सक्रिय

पिछले समय में हुई प्रमुख कार्रवाइयों में—

  • दिसंबर 2024: बिरगांव से 2500 किलो जब्त
  • दिसंबर 2024: निमोरा से 4000 किलो सीज
  • जुलाई 2025: भाठागांव से 1000 किलो जब्त
  • जनवरी 2026: 1700 किलो जब्त
  • अप्रैल 2026: भाठागांव और उरला से 1040 किलो जब्त

इसके बावजूद कुछ इकाइयों में उत्पादन दोबारा शुरू हो जाना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।


प्रतिबंध की दिशा में कदम, FSSAI को भेजा जाएगा प्रस्ताव

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने अब एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए FSSAI को पत्र भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को स्पष्ट रूप से मेन्यू में उल्लेख करना होगा कि वे असली पनीर या एनालॉग उत्पाद परोस रहे हैं।


विभाग की सख्ती जारी, निगरानी बढ़ाने के निर्देश

विभाग का कहना है कि फैक्ट्रियों की लगातार जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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