पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार द्वारा नागरिक समूह ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जो धीरे-धीरे हिंसक झड़पों में बदल गए। इन घटनाओं में अब तक कम से कम 11 लोगों की मौत और 70 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है।
अस्पताल के बाहर शुरू हुआ विवाद, फिर भड़की हिंसा
जानकारी के अनुसार, हिंसा की शुरुआत उस समय हुई जब JAAC समर्थक एक कार्यकर्ता के शव को लेकर अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर एकत्र हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की गई, जिससे स्थिति बिगड़ गई और फायरिंग की घटना सामने आई।
इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। प्रशासन ने हालात को देखते हुए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और बड़े जमावड़ों पर रोक लगा दी है।
JAAC पर प्रतिबंध और लोगों में बढ़ता आक्रोश
पिछले सप्ताह प्रशासन ने JAAC को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था। सरकार का दावा है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी था, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह समूह आम जनता की आवाज उठाता था।
इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी और बढ़ गई है, जिससे प्रदर्शन और तेज हो गए हैं।
प्रदर्शन की मुख्य वजहें क्या हैं?
विरोध प्रदर्शन केवल प्रतिबंध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे भी हैं—
- विधानसभा सीटों का आरक्षण विवाद: 45 सदस्यीय विधानसभा में 12 सीटें बाहर रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने के फैसले का विरोध
- आर्थिक संकट: बढ़ती महंगाई और बिजली कटौती
- बेरोजगारी और प्रशासनिक उपेक्षा
- यूटिलिटी लागत में बढ़ोतरी
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन फैसलों से स्थानीय लोगों की राजनीतिक भागीदारी कमजोर हो रही है।
मानवाधिकार आयोग की चिंता
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। आयोग ने JAAC पर प्रतिबंध के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हर नागरिक का मूल अधिकार है। मामले की जांच के लिए फैक्ट-फाइंडिंग टीम भेजने की तैयारी भी की जा रही है।















































