रायपुर। ग्राम छाती (कुरूद) में आयोजित कुर्मी क्षत्रिय समाज के 55वें अधिवेशन समारोह में साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई। समारोह के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार एवं “मानस विशारद” भेखलाल चंद्राकर द्वारा रचित शोधपरक ग्रंथ “अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम” का विमोचन विष्णुदेव साय के करकमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर समाज के प्रबुद्धजन, साहित्य प्रेमी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
तुलसीदास के जीवन और दर्शन का व्यापक विश्लेषण
कार्यक्रम में कृति का परिचय प्रस्तुत करते हुए त्रेता चंद्राकर ने बताया कि “अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम” केवल गोस्वामी तुलसीदास के जीवन-वृत्त का वर्णन नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व, कृतित्व, आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक दृष्टिकोण और लोकमंगलकारी विचारों का गहन एवं शोधपरक विश्लेषण भी प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ तुलसी साहित्य के अनेक अनछुए पहलुओं को नई दृष्टि से सामने लाता है और भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा तथा भक्ति साहित्य की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
साहित्य समाज को संस्कृति से जोड़ता है : मुख्यमंत्री
विमोचन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लेखक भेखलाल चंद्राकर को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी साहित्यिक कृतियां समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल्यों से जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह ग्रंथ साहित्य प्रेमियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी एवं प्रेरणादायक सिद्ध होगा।
परिवार और शुभचिंतकों की रही विशेष उपस्थिति
कार्यक्रम में लेखक की धर्मपत्नी कुंती देवी, सुपुत्र ओंकार चंद्राकर एवं सुपुत्री ऋचा चंद्राकर सहित अनेक परिजन और शुभचिंतक उपस्थित रहे। इस अवसर पर रामचंद्र विश्वकर्मा, सुरेश चंद्राकर, दीपक मानिकपुरी, महावीर चंद्राकर, आशाराम साहू, सेवक साहू तथा हीरालाल साहू सहित अनेक गणमान्यजन समारोह में शामिल हुए।
साहित्यिक वातावरण में हुआ भव्य आयोजन
सौहार्दपूर्ण और साहित्यिक वातावरण में संपन्न इस आयोजन में उपस्थित जनों ने “अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम” की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और साहित्य के लिए महत्वपूर्ण योगदान बताया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं उपस्थित नागरिकों ने लेखक को उनकी इस उल्लेखनीय कृति के लिए शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की।















































