बिलासपुर में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 2003 के चर्चित जग्गी हत्याकांड में साजिश का दोषी करार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के चर्चित जग्गी हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन्हें साजिश रचने का दोषी माना है और अन्य दोषियों के समान सजा देने के आदेश जारी किए हैं।
2003 में रायपुर में हुई थी रामावतार जग्गी की हत्या, राजनीतिक हलकों में मचा था हड़कंप
यह मामला वर्ष 2003 का है, जब रायपुर में व्यवसायी और राजनीतिक रूप से सक्रिय रामावतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी। उस समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अजीत जोगी थे, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील बन गया था।
सीबीआई जांच के बाद कोर्ट तक पहुंचा मामला, पहले बरी हुए थे अमित जोगी
इस केस की शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी, जिसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। वर्ष 2007 में सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, हालांकि उस समय अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था।
सीबीआई की अपील और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद फिर से खुला मामला
सीबीआई ने अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसे पहले देरी के आधार पर खारिज कर दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला पुनः हाईकोर्ट में सुना गया।
हाईकोर्ट ने पहले दोषी करार दिया, तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण के दिए थे निर्देश
पिछले वर्ष सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उन्हें तीन सप्ताह के भीतर अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। इसके बाद अब अंतिम निर्णय में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
फैसले पर प्रतिक्रिया, पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही
फैसले के बाद मृतक रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने इसे महत्वपूर्ण कदम बताया और आगे सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कड़ी सजा की मांग करने की बात कही है।















































