दंतेवाड़ा: डंकनी नदी तट स्थित पर्णकुटी श्रीराम मंदिर में आयोजित चैत्र नवरात्रि और रामनवमी का पर्व पूरे उत्साह, भक्ति और अनुशासन के साथ मनाया गया. इस बार धार्मिक आयोजन ने न केवल आस्था को नई ऊर्जा दी, बल्कि क्षेत्र में अमन-चैन का संदेश भी मजबूती से स्थापित किया.
दंतेवाड़ा में नवरात्रि और रामनवमी
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर पूरे नौ दिनों तक मंदिर परिसर में पूजा-पाठ, हवन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया.हर दिन शाम को अलग-अलग रामायण मंडलियों द्वारा रामायण पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. रामनवमी के दिन भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर भगवान श्रीराम के चरणों में शीश नवाते रहे और सुख-समृद्धि की कामना करते रहे.
मानस मंडलियों ने राम भजनों और मां के भजनों से माहौल को भक्तिमय बनाया
रामनवमी के दिन शुक्रवार सुबह विधिवत पूजा-अर्चना के साथ मुख्य आयोजन संपन्न हुआ. मंदिर में विशेष पूजन, आरती और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम हुआ, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए. पूरे दिन भक्ति गीतों और राम नाम के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा. बालपेट, घोटपाल, पेंटा, चंदेनार और बालूद से आई मानस मंडलियों के कलाकारों ने अपने मधुर भजनों से माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया.
पर्णकुटी श्रीराम मंदिर
इस आयोजन का एक विशेष पहलू पर्णकुटी श्रीराम मंदिर का इतिहास भी रहा, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान जब आसपास का इलाका प्रभावित हुआ, तब भी मंदिर में स्थापित भगवान श्रीराम की आदमकद प्रतिमा अपने स्थान पर अडिग रही.इसे स्थानीय लोग चमत्कार के रूप में देखते हैं. बाद में मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया और अब यह पहले से भी अधिक भव्य स्वरूप में श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है.
नक्सलगढ़ में रामनवमी का पर्व भक्ति, संस्कृति और एकता का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जिसने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया. पर्णकुटी श्रीराम मंदिर में नवरात्रि और रामनवमी का पर्व संपन्न हुआ. रामायण मंडलियों ने बड़े उत्साह के साथ सहयोग किया. इस बार का पर्व बहुत ही ज्यादा उल्लास से मना. भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का ज्यादा समय दंडकारण्य में बिताया था. वनवास में पर्णकुटी में ही रहे थे, इसलिए इस बार पर्णकुटी राम मंदिर मनाया गया –शैलेंद्र ठाकुर
रामनवमी पर भव्य शोभा यात्रा
शाम होते ही रामनवमी का उल्लास चरम पर पहुंच गया. भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. श्रीराम के जयकारों और भक्ति गीतों पर लोग झूमते नजर आए. डीजे की धुन पर युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया. बाहर से आई नाच मंडली द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े.
इस पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. नक्सल प्रभावित क्षेत्र में इस तरह का भव्य और शांतिपूर्ण आयोजन होना अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है. यह दर्शाता है कि अब बस्तर विकास और सामाजिक समरसता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं और आपसी भाईचारे को मजबूत करते हैं. रामनवमी का यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि नक्सलगढ़ में बदलते हालात और बढ़ती शांति का भी संदेश दे गया.















































