शिक्षा अधिकार कानून पर संकट: हाईकोर्ट सख्त, छुट्टी के दिन चली सुनवाई, हजारों आवेदन लंबित

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RTE विवाद पर छत्तीसगढ़ में टकराव बढ़ा, 6000 निजी स्कूलों ने गरीब बच्चों को एडमिशन देने से इंकार किया। हाईकोर्ट ने 16 हजार लंबित आवेदनों पर सरकार से जवाब मांगा।

CG High Court on RTE Admision: शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत कक्षा पहली में प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। एक रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

खंडपीठ ने जताई नाराजगी

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा (Ramesh Sinha) और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल (Ravindra Kumar Agrawal) की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी।

38 हजार में से 16 हजार आवेदन लंबित

सुनवाई में सामने आया कि कुल 38,438 आवेदनों में से सिर्फ 23,766 का ही सत्यापन हो पाया है, जबकि 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित हैं। कई जिलों में सत्यापन की स्थिति बेहद खराब है। कोर्ट ने माना कि नोडल प्राचार्यों की धीमी कार्यप्रणाली के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

प्राइवेट स्कूलों का बड़ा फैसला, एडमिशन से इंकार

रायपुर में निजी स्कूल प्रबंधन और सरकार के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। प्राइवेट स्कूलों ने ऐलान किया है कि वे अब RTE के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं देंगे।

निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि पिछले 14 सालों से सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाई गई है। इसको लेकर वे लंबे समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

“राशि बढ़ाओ, नहीं तो एडमिशन नहीं”

स्कूल प्रबंधन ने साफ कहा है कि जब तक प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाई जाती, तब तक वे RTE के तहत किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं देंगे। लॉटरी के माध्यम से चयनित छात्रों को भी स्कूलों में दाखिला नहीं दिया जाएगा।

6000 स्कूलों पर पड़ेगा असर

इस फैसले का असर प्रदेश के करीब 6000 निजी स्कूलों पर पड़ेगा। इसका सीधा असर हजारों गरीब और वंचित बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा, जिनके लिए RTE ही निजी स्कूलों में शिक्षा का एकमात्र माध्यम है।

शिक्षा विभाग पर डाली जिम्मेदारी

निजी स्कूलों ने इस पूरे विवाद के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि कम प्रतिपूर्ति राशि और नीतिगत स्पष्टता की कमी के कारण उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।

लॉटरी प्रक्रिया पर भी संकट

कोर्ट ने पहले ही संकेत दे दिया है कि 13 से 17 अप्रैल के बीच प्रस्तावित स्कूल आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अब निजी स्कूलों के इस फैसले से स्थिति और जटिल हो गई है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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