सीएसईबी दर्री के होनहार कमल किशोर राठौर बने उप निरीक्षक, एक वर्ष की कठिन ट्रेनिंग पूरी कर हासिल की बड़ी सफलता

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कठिन परिस्थितियों में भी नहीं टूटा हौसला, 20 वर्ष सेना सेवा के बाद उप निरीक्षक पद पर चयन, क्षेत्र में खुशी की लहर

सक्ती। सीएसईबी दर्री कोरबा के होनहार युवक कमल किशोर राठौर ने एक वर्ष की कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी कर उप निरीक्षक पद पर चयनित होकर अपने माता-पिता और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।


बचपन से मेधावी और परिश्रमी रहे कमल किशोर, सीमित संसाधनों में भी हासिल किया लक्ष्य

कमल किशोर राठौर बचपन से ही मेधावी और परिश्रमी रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और निरंतर मेहनत के बल पर लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ते रहे।

उन्होंने प्रारंभ में सेना में चयन प्राप्त किया और लगभग 20 वर्षों तक देश की सेवा की। इसके बाद उन्होंने उप निरीक्षक बनने का लक्ष्य तय किया, जिसे उन्होंने कठिन प्रशिक्षण के बाद हासिल कर लिया।


पिता के निधन के बाद भी नहीं डिगा मनोबल, मां और परिवार ने दिया साथ

उनके पिता स्वर्गीय खिलावन उज्जैनी, जो ग्राम दुरपा के मूल निवासी थे और सीएसईबी दर्री कोरबा में अधिकारी पद पर कार्यरत थे, का कम उम्र में निधन हो गया था। इस कठिन परिस्थिति के बावजूद कमल किशोर ने हिम्मत नहीं हारी।

उन्होंने अपनी मां अहिल्या बाई, नाना स्वर्गीय भागवत राठौर, गुरुजनों और परिवार के सहयोग से अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास जारी रखा।


सफलता का श्रेय परिवार और गुरुजनों को दिया, वर्दी को बताया जिम्मेदारी

कमल किशोर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और गुरुजनों को दिया। उन्होंने कहा कि वर्दी उनके लिए केवल नौकरी नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई बातों का उपयोग जनहित में करेंगे और पुलिस तथा आम जनता के बीच दूरी कम कर मित्र पुलिसिंग को बढ़ावा देंगे।


परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर, देर शाम तक मिलते रहे बधाई संदेश

उप निरीक्षक पद पर चयन होने की खबर से परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी पत्नी सरिता, बेटी खुशी, एंजल तथा भाई-बहनों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।

क्षेत्रवासियों ने भी उनकी सफलता पर गर्व व्यक्त किया और कहा कि कमल किशोर ने साबित कर दिया कि विषम परिस्थितियों में भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं। देर शाम तक बधाई देने वालों का सिलसिला जारी रहा।

 

Amit sahu
Author: Amit sahu

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