शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश समेत पूरे देश में आग लगी हुई है। मामला चूकिं राष्ट्रीय स्तर का हो गया है, सो अब विरोध में 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय आंदोलन होगा।
CG TET Protest: शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश समेत पूरे देश में आग लगी हुई है। मामला चूकिं राष्ट्रीय स्तर का हो गया है, सो अब विरोध में 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय आंदोलन होगा। हालांकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 2 अप्रैल को होना है।
दिल्ली प्रदर्शन में सीजी समेत देशभर के शिक्षक होंगे शामिल
दिल्ली प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ समेत देशभर के राज्यों से आए शिक्षक शामिल होंगे। यह प्रदर्शन टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में किया जा रहा है।
आंदोलन का नेतृत्व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार जैन एवं मनीष मिश्रा करेंगे। छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में शिक्षक दिल्ली कूच की तैयारी कर चुके हैं।
दिल्ली जाने को सिलसिला शुरू
विभिन्न जिलों से शिक्षकों का समूह दिल्ली रवाना होने लगा है। संगठन का कहना है कि वर्षों से कार्यरत अनुभवी शिक्षकों पर पात्रता परीक्षा थोपना अन्यायपूर्ण है। शिक्षकों की मांग है कि टीईटी के नियमों को सरल बनाया जाए या पहले से कार्यरत शिक्षकों को इससे मुक्त रखा जाए।
देश के 50 लाख टीचर्स के सिर पर लटकी तलवार
देशभर के करीब 50 लाख शिक्षकों के सिर पर इस वक्त शिक्षक पात्रता परीक्षा की तलवार लटकी हुई है।
दरअसल, 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट से अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा का आदेश जारी किया गया था। इस आदेश के हवाले से 2 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय ने एक पत्र जारी किया। इसमें वर्ष 2009 से पहले भर्ती शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा को अनिवार्य कर दिया। जिसके बाद से प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। देशभर में इससे करीब 50 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट में 2 अप्रैल 2026 को सुनवाई के लिए लिस्टेड कर लिया है यानी अब 2 अप्रैल 2026 को इस मामले पर सुनवाई होगी। इसमें स्पष्ट होगा कि सरकारी शिक्षकों को राहत मिलेगी या नहीं?
सुप्रीम कोर्ट का आदेश एमपी-सीजी के लिए नहीं
आत्मनिर्भर शिक्षक संदर्भ समूह के संस्थापक व एनसीईआरटी के पूर्व सदस्य दामोदर जैन के मुताबिक, यह आदेश उन अल्पंसख्यक संस्थाओं के लिए है, जहां धार्मिक शिक्षा दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट में करीब 22 से 25 याचिकाओं को क्लब करके आदेश दिया है। यह आदेश उन्हीं संस्थानों पर लागू होना चाहिए। इसमें छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सरकार या सरकारी शिक्षकों से कोई लेना-देना नहीं है।
RTE को आधार मानकर जरूरी किया टेस्ट
जैन ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 21 1, 2, 3 में पात्रता परीक्षा का कोई उल्लेख ही नहीं है। इसमें स्पष्ट है कि तत्कालीन राज्य या केंद्र सरकार अपनी न्यूनतम मापदंड तय करेंगे। उसी के अनुरूप शिक्षकों का वैरिफिकेशन हो जाएगा। मापदंड पूरे कर रहे हैं तो ठीक, वरना अगले पांच साल में मापदंड पूरे करना अनिवार्य है।















































