रायपुर। भीषण गर्मी की चपेट में आ चुके छत्तीसगढ़ में आम जनजीवन को ग्रीष्म लहर ने बुरी तरह प्रभावित किया है। आसमान से आग की तरह बरसती गर्मी के बीच राज्य में हीट स्ट्रोक के 454 संदिग्ध केस सामने आए हैं। गंभीर बात यह है कि कुल आंकड़ों का पचास फीसदी मामला राजनांदगांव से संबंधित है, जिसे स्वास्थ्य विभाग ने रेड जोन में रखा है।
सबसे गर्म जिला नांदगांव
इस बार गर्मी के सीजन में बीमार होकर अस्पताल पहुंचने वालों की संख्या 63851 है। जानकारों का तर्क है कि नांदगांव राज्य का सबसे गर्म जिला है, वहां का तापमान 44 से 46 डिग्री दर्ज किया जा रहा है, इसलिए लोग ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं। प्रदेश में वैसे तो गर्मी का मौसम मार्च से शुरू हो जाता है, मगर इसका प्रभाव अप्रैल मई में ज्यादा नजर आता है।
हीट स्ट्रोक से लोगों की स्थिति गंभीर
राज्य में वर्तमान में पड़ रही गर्मी ने सामान्य जनजीवन को झकझोर कर रख दिया है। पिछले दिनों से चल रही ग्रीष्म लहर से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों तक पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक हीट स्ट्रोक की वजह से लोगों की स्थिति तो गंभीर नहीं हो रही है, मगर अस्पताल आकर उन्हें जरूरी दवा जरूर लेनी पड़ रही है।
बड़ी संख्या में हीट स्ट्रोक के केस
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की मानें, तो 1 मार्च से 24 मई के बीच राज्य में हीट स्ट्रोक के 454 संदिग्ध केस सामने आ चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग पचास फीसदी यानी 225 केस राजनांदगांव जिले से संबंधित हैं। बड़ी संख्या में हीट स्ट्रोक के केस आने की वजह से जिले को रेड जोन में शामिल किया गया है। विभागीय आंकड़ों की मानें, तो इस सीजन में गर्मी से प्रभावित होकर इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों की ओपीडी में 64 हजार के करीब मरीज अपनी जांच के लिए पहुंचे हैं।
रायपुर, दुर्ग, गरियाबंद में भी केस
गर्मी का ज्यादा प्रभाव राज्य के मैदानी जिलों में है। राजनांदगांव का आंकड़ा काफी अधिक है, मगर लू लगने की वजह से बीमार होकर अस्पताल पहुंचने वालों में रायपुर, दुर्ग और गरियाबंद के भी काफी लोग शामिल हैं। रायपुर जिले में भी आंबेडकर अस्पताल, जिला अस्पताल के साथ विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बड़ी संख्या में लोग लू जैसे लक्षणों के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। राहत की बात यह है कि प्रदेश में लू लगने की वजह से मौत नहीं हुई है।
स्ट्रोक के संदिग्ध केस
| राजनांदगांव | 225 |
| रायपुर | 48 |
| गरियाबंद 38 | |
| दुर्ग 30 | |
| जशपुर 28 | |
| रायगढ़ 20 | |
| बेमेतरा 13 | |
| बीजापुर 12 |
ओपीडी में मरीज पर भर्ती नहीं
अस्पतालों की ओपीडी में तो बढ़ी संख्या में इलाज के लिए मरीज पहुंच रहे हैं मगर उन्हें बनाए गए लू वार्डों में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी है। राज्य के तमाम मेडिकल कालेजों में लू के पृथक वार्ड बनाए गए हैं। रायपुर, राजनांदगांव समेत अन्य जिला अस्पतालों में बॉथ टब और बर्फ मशीन की सुविधा वाले वार्ड तैयार किए गए हैं। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य केंदग्रों में भी इस तरह के इंतजाम है जिसकी जरूरत मरीजों को नहीं पड़ी है।
लू से बचने क्या सावधानी जरूरी
- दोपहर 12 से 4 बजे तक बिना किसी जरूरी काम के सीधे धूप में निकलने से बचें।
- प्यास न भी लगे, तो भी लगातार पानी, ओआरएस घोल, नींबू पानी या छाछ पीते रहें।
- बाहर निकलते समय शरीर को सूती और हल्के रंग के कपड़ों से ढककर रखें, सिर पर टोपी या स्कार्फ जरूर बांधें।
सावधानी बरतना जरूरी
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्यकम के राज्य नोडल अफसर डॉ. स्मृति देवागंन ने बताया कि, तेज गर्मी के बीच घरों एवं दफ्तरों से बाहर निकलने के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है। राज्य में हीट स्ट्रोक के केस सामने आए, मगर स्थिति गंभीर नहीं है। प्रभावितों के इलाज के लिए तमाम अस्पतालों में पर्याप्त इंतजाम किया गया है।















































