रायपुर। चार राज्यों में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों में कांग्रेस का खाता नहीं खुलने के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी चुनावी हार के लिए बैलेट पेपर, मतदाता सूची और ईवीएम को जिम्मेदार ठहराती रही है, जबकि वास्तविक समस्या पार्टी के भीतर है। उन्होंने कांग्रेस को आत्मावलोकन करने की सलाह देते हुए कहा कि पार्टी देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार जनता का समर्थन खो रही है।
बैलेट पेपर से चुनाव होने के बाद भी कांग्रेस का प्रदर्शन शून्य: ओपी चौधरी
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि कांग्रेस लगातार ईवीएम पर सवाल उठाती रही है और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है। लेकिन हाल ही में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और बिहार में हुए एमएलसी चुनाव बैलेट पेपर से संपन्न हुए। इसके बावजूद कांग्रेस को इन चुनावों में सफलता नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की समस्या न तो बैलेट पेपर में है, न मतदाता सूची में और न ही ईवीएम में। समस्या पार्टी के अंदर है। कांग्रेस को अपनी हार के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए, लेकिन वह ऐसा करने के बजाय लगातार आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रही है।
परिवारवाद और चापलूसी की राजनीति का लगाया आरोप
ओपी चौधरी ने कांग्रेस की संगठनात्मक कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस परिवारवाद और चापलूसी की राजनीति से ग्रसित पार्टी बनकर रह गई है। उनके मुताबिक, पार्टी को अपनी आंतरिक समस्याओं और राजनीतिक कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की जरूरत है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
वित्त मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे देश में अराजकता का माहौल बनाकर सत्ता हासिल करना चाहते हैं। उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल और फ्रांस जैसे देशों की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाए।
ओपी चौधरी ने कहा कि भारत के लोकतंत्र की जड़ें बेहद मजबूत हैं और देश की जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखती है। उनके अनुसार, देश की जनता अराजकता की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।
चुनावी नतीजों को लेकर जारी है सियासी बयानबाजी
चार राज्यों के एमएलसी चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर छत्तीसगढ़ में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इन नतीजों को कांग्रेस की आंतरिक चुनौतियों से जोड़ते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।





























