Cyber Fraud Bilaspur : IIIT हैदराबाद में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर छात्रा से 12 लाख की ठगी, पुलिस ने शुरू की जांच

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बिलासपुर। उच्च शिक्षा में प्रवेश दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। तारबाहर थाना क्षेत्र की 12वीं उत्तीर्ण छात्रा से प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान IIIT हैदराबाद में प्रवेश दिलाने का झांसा देकर कथित एडमिशन कंसल्टेंसी के लोगों ने करीब 12 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एडमिशन कंसल्टेंसी बनकर आरोपियों ने जीता भरोसा

पुलिस के अनुसार तारबाहर क्षेत्र निवासी छात्रा ऋषिका तिवारी बेहतर कॉलेज में प्रवेश की जानकारी तलाश रही थी। इसी दौरान उसे गूगल और सोशल मीडिया के माध्यम से “प्राइम पाथ एडमिशन” नामक कथित एडमिशन कंसल्टेंसी का संपर्क मिला।

कंसल्टेंसी के प्रतिनिधियों ने छात्रा को SAT परीक्षा के माध्यम से IIIT हैदराबाद में प्रवेश दिलाने का भरोसा दिया। आरोपियों ने परीक्षा फॉर्म भरने से लेकर पूरी प्रवेश प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेने की बात कही, जिससे छात्रा और उसके परिवार को उन पर विश्वास हो गया।

किस्तों में ट्रांसफर कराए 12 लाख रुपये

शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने पहले पुणे में मुलाकात के दौरान 4 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से जमा करवाए। इसके बाद हैदराबाद के गाचीबोली स्थित एक होटल में बुलाकर शेष 8 लाख रुपये भी बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए गए।

आरोपियों ने छात्रा को दो सप्ताह के भीतर एडमिशन लेटर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।

एडमिशन नहीं हुआ तो बंद कर दिया संपर्क

निर्धारित समय बीतने के बाद भी जब छात्रा को प्रवेश पत्र नहीं मिला तो उसने आरोपियों से संपर्क किया। शुरुआत में आरोपी व्हाट्सएप कॉल और संदेशों के माध्यम से राशि वापस करने का भरोसा देते रहे, लेकिन 28 जुलाई की शाम से सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए।

इसके बाद छात्रा को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की।

डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच में जुटी पुलिस

पीड़िता ने पुलिस को बैंक लेनदेन की रसीदें, आरटीजीएस विवरण, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग सहित अन्य डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं। पुलिस इन सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

तारबाहर पुलिस ने तीन मोबाइल नंबर धारकों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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