आंध्र प्रदेश में दो मौतों के बाद बढ़ी निगरानी, ओडिशा सरकार ने अस्पतालों को किया अलर्ट
नई दिल्ली। भारत में एक बार फिर कोरोना संक्रमण को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। इस बीच मशहूर गायक कुमार सानू के बेटे और ‘बिग बॉस’ के पूर्व प्रतियोगी जान कुमार सानू के भी कोविड-19 संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। फिलहाल उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
जान कुमार सानू ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
जान कुमार सानू ने अस्पताल के बेड से एक वीडियो साझा करते हुए अपने कोविड संक्रमित होने की जानकारी दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा, “चाइना से आया मेरा दोस्त, कोविड को सलाम करो।” पोस्ट सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों ने जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
आंध्र प्रदेश में दो मौतों के बाद बढ़ी चिंता
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आंध्र प्रदेश में हाल के दिनों में कोरोना संक्रमण से दो मरीजों की मौत हुई है। राज्य में फिलहाल कुछ सक्रिय मामले दर्ज हैं, जिसके बाद निगरानी बढ़ा दी गई है। विशेष रूप से कडप्पा जिले में संक्रमण के नए मामलों पर स्वास्थ्य विभाग लगातार नजर रख रहा है।
ओडिशा सरकार ने अस्पतालों को किया अलर्ट
पड़ोसी राज्य ओडिशा ने एहतियात के तौर पर सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। गंभीर सांस संबंधी बीमारी (SARI) से पीड़ित प्रत्येक मरीज की कोविड जांच अनिवार्य करने के साथ फ्लू जैसे लक्षण (ILI) वाले मरीजों की भी नियमित जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
यदि किसी मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उसके सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जाएगा, ताकि संक्रमण के वैरिएंट की पहचान की जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। लोगों से अपील की गई है कि बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। नियमित रूप से हाथ धोने, स्वच्छता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।
फेफड़ों पर असर के दावों को लेकर सावधानी जरूरी
कुछ मामलों में गंभीर निमोनिया और फेफड़ों पर संक्रमण का असर देखा गया है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि वर्तमान में फैल रहा हर संक्रमण सभी मरीजों के फेफड़ों को “पूरी तरह खराब” कर देता है। बीमारी की गंभीरता व्यक्ति की उम्र, पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं, प्रतिरक्षा क्षमता और अन्य चिकित्सीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। ऐसे दावों की पुष्टि डॉक्टर की जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही की जानी चाहिए।















































