Raigarh News : श्रम न्यायालय का बड़ा फैसला, सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर 5 उद्योगों पर 8 लाख रुपये का जुर्माना

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कारखाना अधिनियम के उल्लंघन पर एनआर इस्पात, जिंदल पावर, अंजनी स्टील और अन्य उद्योगों पर कार्रवाई

रायगढ़। जिले में औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों के पालन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर के निर्देश पर कार्यालय उप संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा द्वारा किए गए निरीक्षण में कारखाना अधिनियम, 1948 के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित उद्योग प्रबंधन के खिलाफ दर्ज प्रकरणों में श्रम न्यायालय रायगढ़ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कुल 8 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।

इन उद्योगों पर लगा जुर्माना

उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि श्रम न्यायालय ने मेसर्स एन.आर. इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड को दोषी पाते हुए 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह प्रकरण 27 अप्रैल 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।

इसी प्रकार मेसर्स जिंदल पावर लिमिटेड के खिलाफ 8 जुलाई 2025 को दायर मामले में न्यायालय ने 3 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया।

वहीं मेसर्स मित्तल स्टोन क्रशर के विरुद्ध 12 जून 2024 को दर्ज प्रकरण में 1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

इसके अलावा मेसर्स अंजनी स्टील लिमिटेड के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में न्यायालय ने क्रमशः 2 लाख रुपये और 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। ये प्रकरण 30 जुलाई 2025 और 20 फरवरी 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत किए गए थे।

सुरक्षा मानकों से समझौता बर्दाश्त नहीं

उप संचालक राहुल पटेल ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों को सुरक्षित और मानक अनुरूप कार्य वातावरण उपलब्ध कराना उद्योग प्रबंधन की कानूनी एवं नैतिक जिम्मेदारी है। कारखाना अधिनियम, 1948 के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों, श्रमिक सुविधाओं और कार्य परिस्थितियों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

निरीक्षण अभियान रहेगा जारी

उन्होंने बताया कि जिले के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में समय-समय पर निरीक्षण अभियान चलाकर सुरक्षा उपायों, स्वास्थ्य सुविधाओं और श्रम कानूनों के पालन की समीक्षा की जाती है। जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उद्योगों में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करना और श्रमिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना भी है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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