राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता मामला। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गबन और वित्तीय अनियमितताओं की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
📌 याचिका में क्या मांग की गई थी?
यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर की गई है। इसमें मांग की गई थी कि—
- श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की जांच की जाए
- कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई के नेतृत्व में एसआईटी से कराई जाए
- मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और दान की पारदर्शिता के लिए मजबूत निगरानी और ऑडिट व्यवस्था बनाई जाए
⚖️ याचिकाकर्ताओं के आरोप
याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट से जुड़े धन के कथित गबन और अनियमितताओं की खबरों ने जनता में चिंता पैदा की है। इसलिए इन आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि—
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने बिना औपचारिक एफआईआर के प्रारंभिक जांच शुरू की
- ऐसे मामलों में विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराना अधिक उपयुक्त होगा
🏛️ अदालत का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि इसे निर्धारित समय पर ही सुना जाएगा।
📢 मामला क्यों चर्चा में?
यह मामला इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि इसमें—
- धार्मिक ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता
- बड़े पैमाने पर दान और चढ़ावे की निगरानी
- और जांच एजेंसी की भूमिका
जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।















































