सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में धान खरीदी से लेकर संग्रहण तक की पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। वर्ष 2024-25 के दौरान संग्रहित लगभग 24 हजार क्विंटल धान खराब होने का मामला सामने आया है। शुरुआती आकलन के अनुसार इससे शासन को करीब 8 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई है। मामले ने प्रशासनिक लापरवाही, भंडारण व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
15 महीने तक नहीं हुआ उठाव, बारिश और नमी से खराब हुआ धान
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सुकमा धान संग्रहण केंद्र में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान समय पर मिलिंग या परिवहन के लिए नहीं भेजा गया। संग्रहण केंद्र द्वारा पत्र क्रमांक 24, दिनांक 20 मार्च 2026 के माध्यम से जिला विपणन अधिकारी को जानकारी दी गई कि केंद्र में रखी 36,376 बोरी धान, जिसका वजन 24,118.56 क्विंटल है, पूरी तरह खराब हो चुकी है।
बताया गया कि वर्ष 2024-25 खरीदी का धान करीब 15 महीनों तक बिना उठाव के पड़ा रहा। लंबे समय तक खुले या अपर्याप्त सुरक्षा में भंडारण के कारण बारिश, नमी और रखरखाव की कमी ने धान की गुणवत्ता पूरी तरह खराब कर दी।
रिकॉर्ड में 24 हजार क्विंटल, मौके पर मिले सिर्फ 13 हजार क्विंटल
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू भौतिक सत्यापन और ऑनलाइन रिकॉर्ड के बीच बड़ा अंतर है। जिला विपणन अधिकारी चेतन आनंद थवाईत द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में संग्रहण केंद्र में करीब 13 हजार क्विंटल धान उपलब्ध बताया गया।
वहीं ऑनलाइन रिकॉर्ड में अब भी 24 हजार क्विंटल धान दर्ज है। यानी करीब 12 हजार क्विंटल धान का अंतर सामने आया है। इससे सवाल उठ रहा है कि रिकॉर्ड में दर्ज बाकी धान कहां गया? उसका परिवहन हुआ या नहीं? यदि हुआ तो दस्तावेज कहां हैं? और यदि नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
समय पर परिवहन होता तो बच सकता था करोड़ों का नुकसान
सूत्रों के अनुसार यदि धान का नियमित निरीक्षण किया जाता और समयबद्ध तरीके से परिवहन व सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित किया जाता, तो इतनी बड़ी क्षति रोकी जा सकती थी। यह धान किसानों की मेहनत और सरकारी धन से खरीदा गया था, इसलिए इस नुकसान को सिर्फ सामान्य प्रशासनिक चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
करोड़ों के नुकसान के बाद भी कार्रवाई नहीं
सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही को लेकर है। करोड़ों रुपये के धान खराब होने और रिकॉर्ड में भारी अंतर सामने आने के बावजूद अब तक किसी अधिकारी या कर्मचारी पर ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
किसान और आमजन जानना चाहते हैं कि आखिर इस नुकसान के लिए जिम्मेदार कौन है और दोषियों पर कार्रवाई कब होगी।
संग्रहण केंद्र प्रभारी ने कही यह बात
सुकमा संग्रहण केंद्र प्रभारी दीपेन्द्र सिंह ठाकुर ने खराब धान की पुष्टि करते हुए बताया कि इस संबंध में कई बार वरिष्ठ कार्यालयों को पत्र लिखकर जानकारी दी गई थी। लेकिन बार-बार सूचना देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
जांच और जवाबदेही पर टिकी नजर
अब पूरे मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला केवल लापरवाही का है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी अनियमितता भी छिपी हुई है।















































