संघर्ष और मेहनत से बनी पहचान, छत्तीसगढ़ की किरण पिस्दा ने यूरोप तक पहुंचाया अपना खेल
रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रतिभाशाली फुटबॉलर किरण पिस्दा आज भारतीय महिला फुटबॉल के उभरते सितारों में गिनी जा रही हैं। संघर्ष, आत्म-सुधार और निरंतर मेहनत के दम पर उन्होंने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई, बल्कि यूरोप की लीग तक पहुंचकर अपने खेल का लोहा मनवाया है। अब वह भारतीय सीनियर टीम में जगह बनाने के बेहद करीब हैं।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में शानदार प्रदर्शन, सेमीफाइनल में दिखाई प्रतिभा
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट के दौरान किरण का आत्मविश्वास और शांत प्रदर्शन चर्चा का विषय रहा। उनके खेल ने यह साबित किया कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
साधारण पृष्ठभूमि से राष्ट्रीय मंच तक का सफर, परिवार और स्कूल का मिला साथ
किरण पिस्दा का सफर आसान नहीं रहा। परिवार, स्कूल और खासकर उनके भाई गिरीश पिस्दा के समर्थन ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। स्कूल स्तर से शुरू हुआ उनका खेल सफर धीरे-धीरे राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा, जिसके बाद रायपुर में फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई के दौरान उन्होंने और बेहतर प्रदर्शन किया।
असफलता बनी सफलता की नींव, राष्ट्रीय शिविर से मिला सीखने का मौका
राष्ट्रीय शिविर में शुरुआती चयन न होना उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ। उस समय फिटनेस और मानसिक मजबूती की कमी के कारण उन्हें बाहर होना पड़ा, लेकिन इसी अनुभव ने उन्हें अपने खेल पर गहराई से काम करने की प्रेरणा दी।
फिटनेस, मानसिक मजबूती और कोचिंग ने बदला खेल का स्तर
किरण ने अपनी फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया और खेल की तकनीकी बारीकियों को समझने की दिशा में लगातार काम किया। इस बदलाव में उनके कोच योगेश कुमार जांगड़ा की अहम भूमिका रही, जिन्होंने हर परिस्थिति में उन्हें सकारात्मक रहने की सीख दी।
बहुमुखी प्रतिभा बनी ताकत, कई पोजिशन पर दिखाया दम
किरण पिस्दा ने स्ट्राइकर, मिडफील्ड और फुल-बैक जैसी विभिन्न पोजिशनों पर खेलकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की है। केरल ब्लास्टर्स जैसे क्लब के साथ उनका अनुभव उनके खेल को और निखारने में मददगार रहा।
यूरोपियन लीग का अनुभव, डिनामो ज़ाग्रेब से जुड़ाव ने बढ़ाया आत्मविश्वास
2022 सैफ चैंपियनशिप और क्रोएशिया की महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए खेलते हुए किरण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव हासिल किया। हालांकि हाल ही में एएफसी महिला एशियन कप में चयन न होना उनके लिए एक नई चुनौती साबित हुआ।
दबाव में संयम और टीम भावना को मानती हैं सफलता की कुंजी
किरण का मानना है कि उच्च स्तर पर सफलता के लिए मानसिक संतुलन और संयम बेहद जरूरी है। वह टीमवर्क को व्यक्तिगत प्रदर्शन से अधिक महत्वपूर्ण मानती हैं और इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बताती हैं।
जनजातीय क्षेत्रों की प्रतिभा को आगे लाने का संकल्प
जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाली किरण पिस्दा का मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच दूरदराज के खिलाड़ियों के लिए बड़ा अवसर हैं। ये आयोजन न केवल प्रतिभा को निखारते हैं बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता भी देते हैं।
अगला लक्ष्य: भारतीय टीम में स्थायी जगह और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट
किरण का लक्ष्य अब भारतीय महिला फुटबॉल टीम में स्थायी स्थान बनाकर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में देश का प्रतिनिधित्व करना है। उनके अनुसार, असफलता अंत नहीं बल्कि और अधिक मेहनत का संकेत है।















































