नई दिल्ली : ईरान और इजराइल जंग के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से भारत में मौजूदा हालात की समीक्षा की गई.
बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जेपी नड्डा, अश्विनी वैष्णव, मनोहर लाल खट्टर, प्रह्लाद जोशी, राममोहन नायडू और हरदीप सिंह पुरी समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं. वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विधानसभा चुनाव प्रचार में केरल में होने की वजह से वह बैठक में शामिल नहीं हो सके.
सीसीएस की बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, पीएम के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी मौजूद हैं. कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, खासकर एलएनजी/एलपीजी, की सप्लाई और बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी. अलग-अलग देशों से नई सप्लाई के साथ एलपीजी की खरीद के लिए सोर्स को अलग-अलग किया जा रहा है. इसी तरह, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी अलग-अलग देशों से ली जा रही है. उन्होंने आगे बताया कि घरेलू कंज्यूमर्स के लिए एलपीजी की कीमतें वही रही हैं और एलपीजी की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग को रोकने के लिए एंटी-डायवर्जन कानून रेगुलर तौर पर लागू किया जा रहा है.
बैठक में मौजूदा व्यापक आर्थिक स्थिति का रिव्यू किया गया और तुरंत सुरक्षा उपायों और लचीलेपन को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति, दोनों पर विचार-विमर्श किया गया. सरकार ऊर्जा सोर्स को अलग-अलग करने, ज़रूरी चीज़ों का बफ़र स्टॉक बनाए रखने और बिना रुकावट घरेलू सप्लाई पक्का करने पर ध्यान दे रही है. भारत ने लगातार तनाव कम करने, बातचीत करने और आम लोगों की जान और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा की मांग की है.
10 दिन में दूसरी बार सीसीएस बैठक
पिछले 10 दिनों के भीतर सीसीएस की यह दूसरी बैठक है. इससे पहले 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीसीएस बैठक की अध्यक्षता की थी. इसमें भारत पर पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभाव को कम करने के उपायों का आकलन किया गया था.
बताया जा रहा है सीसीएस पिछले फैसलों की समीक्षा करेगी. पीएनजी और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित करेगी, उर्वरकों की उपलब्धता का आकलन करेगी और भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श करेगी.
पीएम मोदी कर चुके हैं मन की बात में जिक्र
‘मन की बात’ कार्यक्रम में हाल ही में पीएम मोदी ने इस स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए एकता बनाए रखने का आग्रह किया था. साथ ही पीएम ने अफवाहें फैलाने और इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के प्रति सचेत किया था. उन्होंने इस संकट से निपटने में सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया था. इससे पहले हुई बैठकों में इस संघर्ष के कारण पैदा हुई बाधाओं, विशेष रूप से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़े असर का आकलन किया गया था.















































