कथा के माध्यम से दिया सामाजिक सेवा का संदेश, श्रद्धा और अंधश्रद्धा में बताया बारीक अंतर, ”परपुरुष के पास जाते वक्त महिलाएं रखें सावधानी”: पं. धीरेंद्र शास्त्री

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कोरबा: ढपढप में चल रही 5 दिवसीय हनुमंत कथा का बुधवार को समापन हो गया. बागेश्वर धाम सरकार पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हनुमंत कथा भक्तों को सुना रहे थे. अपना घर सेवा आश्रम द्वारा इस कथा का आयोजन किया गया था. कथा के पांचों दिन भारी तादाद में लोगों यहां पहुंचे. कथा के अंतिम दिन पं. धीरेंद्र शास्त्री ने मीडिया से भी बात की, इस दौरान महाराष्ट्र के बहुचर्चित ज्योतिषाचार्य अशोक खरात पर लगे गंभीर आरोप और विवाद पर भी धीरेंद्र शास्त्री ने खुलकर टिप्पणी की. बाबा बागेश्वर ने कहा कि श्रद्धा और अंध श्रद्धा में बारीक अंतर है.

हनुमंत कथा का समापन

हनुमंत कथा के अंतिम दिन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमन डेका भी कथा स्थल पहुंचे थे. जहां वह सामूहिक विवाह के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए. राज्यपाल बेहद अल्प समय के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे. सामूहिक विवाह में शामिल होने के बाद वह वापस रायपुर लौट गए. हनुमंत कथा में विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया था. कथा के अंतिम दिन 108 निर्धन कन्याओं का विवाह किया गया, जो कि जरूरतमंद थीं. कुछ दिव्यांग भी शामिल थीं, दावा यह भी है कि 500 से अधिक लोगों ने हिंदू धर्म में घर वापसी की है.

आयोजन के दौरान पुलिस ने चाक-चौबंद व्यवस्था बनाकर रखी थी. दोनों एडिशनल एसपी मौके पर मौजूद थे. 300 से अधिक पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी. हालांकि व्यवस्था संभालने में पुलिस के पसीने छूट गए. भीड़ अधिक होने से आयोजन स्थल पर काफी अवस्थाएं भी रही. वीआईपी पास जारी करने के नाम पर विवाद भी हुआ. किसे एंट्री मिलनी है, किसे नहीं मिलनी है. इसे लेकर पांचो दिन विवाद की स्थिति बनी रही. आयोजन समिति ने कहा कि एक बड़ा आयोजन कोरबा में हुआ जिसे उम्मीद से अधिक सफलता मिली है.

क्या कहा अशोक खरात विवाद पर

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अशोक खरात विवाद पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कहां कि देखिए हमारा मानना है कि श्रद्धा और अंधश्रद्धा दोनों में बहुत बारीक फर्क है. बहुत गंभीरता पूर्वक हमें श्रद्धा को समर्पित करना चाहिए. माता बहनों को तो खासकर सावधानी रखनी चाहिए. किसी भी गुरु, महात्मा के प्रति अगर आपकी श्रद्धा है तो एक फ़ासला बनाकर जीवन में चलना चाहिए. बिना पति, पिता और भाई के किसी भी परपुरुष के पास नहीं जाना चाहिए. गुरु ही नहीं किसी भी परपुरुष के पास नहीं जाना चाहिए, हर मार्ग में ऐसे लोग पाये जाते हैं. नेताओं में पाए जाते हैं, संतों में ऐसे लोग पाए जाते हैं, मीडिया में, अधिकारियों में भी ऐसे लोग पाए जाते हैं. लेकिन किसी भी परपुरुष के पास जाते वक्त बहुत ही डिस्टेंस मेंटेन करना चाहिए, और ऐसे लोगों से हमारी प्रार्थना है की भावनाओं में आकर के बहें ना, देखें, जानें और फिर भरोसा करें.

कथावाचकों और धर्म पर टिप्पणी करने वाले लोगों के मुंह पर तमाचा

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यह भी कहा कि पांच दिवसीय हनुमंत कथा का आज विश्राम हुआ है. वनांचल आदिवासी परिवार के बीच में उनके आसपास के लोगों के बीच में जंगल में हनुमान जी के नाम का मंगल हुआ. आज 108 बेटियों का कन्यादान का उत्सव मनाया गया है. कोरबा मां सर्वमंगला की नगरी है. जो पूरे देश को प्रकाशित करता है. ऊर्जा की धानी कोरबा है. यहां पर भक्ति और ज्ञान का प्रकाश हुआ है. बहुत से लोगों ने घर वापसी की है. कुछ लोग मंच पर आने से हिचकिचा रहे थे. उनके घर वापसी का कार्यक्रम बिना कैमरे के संपन्न किया गया? लगभग 500 लोगों के घर वापसी के सूची हमको मिली थी. उसी सूची के आधार पर बहुत सारे लोगों की घर वापसी हुई है.

कुछ लोग सामने आने से संकोच कर रहे थे. सुरक्षागत कारणों से अपना नाम उजागर नहीं करना चाहते थे. तो ऐसा कार्यक्रम हुआ है. जिसमें धर्म भी था, कर्म भी था. भक्ति भी थी, शक्ति भी थी. सनातन की सेवा ऐसी कथाओं के माध्यम से होना यह एक बहुत बड़ा आयोजन है. जब कथाओं के माध्यम से सामाजिक सेवा का कार्य होता है. निर्धन कन्या के सामूहिक विवाह आयोजन पर उन्होंने कहा कि कथाओं के ऊपर संतों के ऊपर या धार्मिक आयोजन पर टिप्पणी करने वालों के मुंह पर एक जोरदार तमाचा लगता है. जिन कथाओं से 108 कन्याओं का घर बसाया जा रहा है. जो बेसहारा हैं, ऐसा कार्य यदि हो रहा है. तो ऐसी कथाएं देश के हर गांव में हर कोने में होनी चाहिए.

Amit sahu
Author: Amit sahu

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