बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त, नक्सल विचारधारा का विकास से कोई लेना देना नहीं: अमित शाह

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नई दिल्ली/रायपुर: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान कहा कि 12 राज्य, सत्तर प्रतिशत भूभाग, 20 करोड़ की आबादी की तरफ से आप सभी का धन्यवाद, जो आपने चर्चा की. नक्सलियों का अन्याय, उनके भविष्य को अंधेर में घेरने वाली व्यवस्था को लेकर संसद में चर्चा हुई. लंबे समय तक इसका मौका नहीं दिया गया है.

बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त: शाह

अमित शाह ने कहा कि 1970 से लेकर 2026 तक नक्सल दंश लोगों ने झेला. भोले-भाले आदिवासियों के सामने गलत नरेटिव रखा गया था कि हम आपके न्याय के लिए लड़ रहे हैं. आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग लगभग समाप्त हो चुका है. बस्तर में हर गांव में स्कूल, हर गांव में राशन की दुकान, हर तहसील पंचायत में पीएचसी, सीएचसी बने, राशन कार्ड और आधार कार्ड बने हैं. गैस के चूल्हे बांटे जा रहे हैं. अमित शाह ने पूछा कि जो लोग नक्सलवाद की वकालत कर रहे हैं, वो बताएं कि 1970 से अबतक बस्तरवासियों को यह सुविधा क्यों नहीं मिली.

”लाल आतंक वजह से विकास पीछे छूटा”

अमित शाह ने कहा कि बस्तर वाले इसलिए छूट गए थे, क्योंकि वहां लाल आतंक की वजह से विकास नहीं हुआ. लाल आतंक की परछाई की वजह से विकास नहीं पहुंचा. आज लाल आतंक की परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है. जो हथियारी मूवमेंट की वकालत कर रहे हैं, उनसे पूछना चाहता हूं कि संविधान को मानेंगे या नहीं? पूरी व्यवस्था को नकारकर हाथ में हथियार उठाना कैसे चलेगा.

”हथियार उठाने वालों को जवाब देना होगा”

अमित शाह ने यह भी कहा कि आज देश में नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा, उसको हिसाब देना पड़ेगा. सरकार संवेदनशील है. सभी समस्या सुनना और उसका निराकरण करना चाहती है.

अमति शाह ने यह भी कहा कि, ”मैं कांग्रेस के लोगों से पूछना चाहता हूं कि 75 साल में 60 साल आपने शासन किया तो आदिवासियों तक विकास क्यों नहीं पहुंचा. 60 साल तक आदिवासियों को घर, पानी नहीं दिया. स्कूल, बैंक सुविधा, मोबाइल टावर की सुविधा नहीं पहुंची और अब आप हिसाब मांग रहे हैं.”

अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ समेत 12 राज्य में रेड कॉरिडोर बनाया गया. 12 करोड़ लोग सालों तक गरीबी में जीते रहे. हजारों युवाओं की मौत हुई. एक एनजीओ के मुताबिक 20 हजार युवा मारे गए. कई लोग अपाहिज बन गए. कौन जिम्मेदार है?

नक्सलवाद का मूल कारण एक आइडियोलॉजी

अमित शाह ने कहा कि क्या लोकतंत्र की पंचायत में इस विषय पर चिंतन नहीं करना चाहिए? नक्सलवाद का मूल कारण एक आइडियोलॉजी है. जिस आइडियोलॉजी को 1970 से इंदिरा गांधी ने स्वीकार कर लिया. 2014 में परिवर्तन हुआ और मोदी के शासन में बरसों पुरानी समस्या का निराकरण हुआ. अब नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी नरेंद्र मोदी के शासन में ही हो रही है. ये 12 साल देश के लिए शुभंकर साबित हुए. देश को गरीबी से मुक्ति, नई शिक्षा पद्धति, आंतरिक बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अच्छे साबित हुए.

जवानों की तारीफ होनी चाहिए

अमित शाह ने कहा कि नक्सल मुक्त भारत का पूरा श्रेय हमारे सीएपीएफ के जवान विशेषकर कोरबा और सीआरपीएफ के जवान, राज्य सरकारों की पुलिस विशेषकर छत्तीसगढ़ पुलिस और वहां के स्थानीय बाशिंदों को जाता है. अगर उनका सहयोग नहीं होता तो कुछ नहीं होता. वामपंथी उग्रवाद समाप्त होने जा रहा है, इसमें जनता का भी बड़ा साथ है. सिक्योरिटी फोर्सेज़ के सैकड़ों जवान मारे गए हैं. मैं पूरे सदन की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि देना चाहता हूं.

अमित शाह ने कहा कि नक्सल विचारधारा का विकास से कोई लेना देना नहीं है. जब हम आजाद हुए तो हमने कहा सत्यमेव जयते. नक्सलवादियों का ध्रुव वाक्य है कि सत्ता बंदूक की नली से निकलता है. यह विचारधारा भोले भाले आदिवासी लोगों तक पहुंचाई गई. इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है. उनको अपनों का खून बहाने से भी परहेज नहीं था.

बस्तर का सिलेक्शन क्यों?

अमित शाह ने बताया कि एक बार एक बच्ची ने पूछा कि माओवादियों ने बस्तर को ही क्यों चुना. शाह ने बताया कि वहां स्टेट की पहुंच कम थी, इसलिए भोले भाले आदिवासियों को बरगलाकर हथियार पकड़ाया गया. अपनी विचारधारा को फैलाने कि लिए वामपंथी उग्रवादियों ने यह इलाका चुना. नक्सलियों ने स्कूल जला दिए, बैंक जला दिए, दवाखाना जला दिए. विकास को वामपंथी उग्रवादियों ने वहां सालों तक नहीं पहुंचने दिया.

नक्सलवाद के कारण बस्तर क्षेत्र में सालों तक गरीबी रही

अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर क्षेत्र में सालों तक गरीबी रही. नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से नहीं फैली हैं. नक्सलबाड़ी में साक्षरता की दर 35 प्रतिशत, बस्तर में साक्षरता की दर 23 प्रतिशत, यूपी का बलिया जिला, वहां साक्षरता की दर 35 प्रतिशत थी. प्रति व्यक्ति आय नक्सलबाड़ी में 500 रुपए, बस्तर में 190, सहरसा में 299 और बलिया में 374 रुपया थी. नक्सलबाड़ी और बस्तर में वामपंथी उग्रवाद पनपा लेकिन सहरसा और बलिया में नक्सलवाद नहीं पनपा. क्योंकि वहां घने जंगल और अनुकुल परिस्थितियां नहीं थी.

अमित शाह ने कहा कि हम लोकतंत्र में हैं. हमने इस देश के संविधान को स्वीकार किया है. अन्याय किसी को भी हो सकता है, विकास कहीं पर भी कम ज्यादा हो सकता है. हम संवैधानिक तरीके से लड़ाई लड़ेंगे, हथियार लेकर नहीं.

80 का दशक आते-आते पीपुल्स वार ग्रुप बन गया

शाह ने कहा कि 1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत नक्सलबाड़ी (पश्चिम बंगाल) से हुई. 80 का दशक आते आते पीपुल्स वार ग्रुप बन गया. फिर तीन राज्यों में फैले. 2004 में प्रमुख गुट मिल गए और सीपीआई माओवादी का गठन हुआ. इस दौरान 4 साल छोड़कर पूरा समय कांग्रेस का शासनकाल रहा.

अमित शाह ने कहा कि देखते ही देखते नक्सलवाद 12 राज्यों में फैल गया. कई सिक्योरिटी एक्सपर्ट ऐसा कहते रहे हैं कि सत्ता के समर्थन के बिना तिरुपति से पशुपतिनाथ तक रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं था.

92 प्रतिशत हथियार, पुलिस के लूटे गए हथियार मिले

अमित शाह ने कहा कि जो हथियार पकड़े गए हैं, उसमें से 92 प्रतिशत हथियार, पुलिस के लुटे गए हथियार थे. थाने लूट लिए गए, गोलियां लूट गई. उसका उपयोग निर्दोष लोगों को मारने के लिए किया गया.

शाह ने कहा कि इस देश में स्टेट का वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया. संविधान पर से श्रद्धा खत्म करने का प्रयास किया गया. नक्सलवादियों के दिन लद गए हैं. अब यह नहीं चलेगा. हमारे यहां 20 हजार लोग मारे गए हैं. यह वैचारिक लड़ाई है.

अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने पैरलल गवर्नमेंट चलाई. छत्तीसगढ़ के बस्तर में उनका होम मिनिस्टर, न्याय मंत्री, लूटे अनाज को बांटने वाला खाद्य मंत्री होता था. जनताना सरकार चलाई. संविधान और न्याय व्यवस्था को निशाना बनाया. मतदान नहीं होने दिया. सरपंच नहीं बनने दिया.

अमित शाह ने कहा कि बस्तर की हर तहसील में जाकर मैंने कहा कि हथियार डाल दो, सरकार पुनर्वास की हर व्यवस्था होगी. जो हथियार डालता है, उसकी व्यवस्था सरकार करती है. जो हथियार डालता है, उसकी व्यवस्था सरकार करती है. नक्सलियों ने 240 करोड़ जनताना टैक्स वसूला.

”1925 में सरकार में सीपीआई की स्थापना हुई”

1925 में सरकार में सीपीआई की स्थापना हुई. रूस में कम्युनिस्ट की सरकार बनी, उसी वक्त यहां सीपीआई बनी. शाह ने पूछा इसके बीच में कोई रिलेशनशीप है क्या? जिस पार्टी की नींव ही किसी दूसरे देश की प्रेरणा से हुई है, वो हमारे देश का भला कैसे सोचेंगे, यह समझने वाली बात है.

1964 में सीपीआई एम बनी. 1964 में सोवियत रुस और चीन के बीच झगड़ा हुई. फिर अलग अलग साम्यवादी विचारधार की दो देशों में सरकार बनी. वैसे ही हमारे देश में भी हुआ.

जेएनएयू में 76 जवानों की शहादत पर जश्न मनाया गया. भारतीय तिरंगे का अपमान हुआ. और तो और उसका वीडियो गर्व के साथ शेयर किया गया. तब उस वक्त के गृहमंत्री चिदंबरम साहब ने नक्सलियों से अपील करते हुए कहा था, हम आपसे हथियार डालने को नहीं कहेंगे क्योंकि आप हथियार डालने में विश्वास नहीं करते: अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

नक्सलवादियों का महिमामंडन करने वालों को दिया जवाब

अमित शाह ने कहा कि नक्सलवादियों का सदन में महिमामंडन करने की जरूरत नहीं है. इस सदन का वो विरोध करते हैं. वोट की जगह वो बुलेट की बात करते हैं. पुलिस और सेना की जरुरत इसलिए हैं क्योंकि कुछ लोग मानते ही नहीं है इसलिए उनको सुधारना पड़ता है. बम विस्फोट से कइयों की जान ले ली, ऐसे में हम चुप नहीं रहेंगे. शाह ने कहा कि अर्बन नक्सलियों से मेरा सवाल है कि जिन लोगों ने 6 हजार आर्टिकल माओवादियों को लेकर लिखें हैं, सबसे में उनके लिए इंसानियत के भाव नजर आते हैं. लेकिन जिन बच्चों को माओवादियों ने गांव से उठा लिया, संगठन में जबरन भर्ती कर लिया उनके लिए कोई आर्टिकल नहीं लिखा गया. किसानों और युवाओं के लिए कुछ नहीं कहा गया. जिन्होने हिंसा में हाथ और पैर गंवाए उनके लिए दो शब्द नहीं लिखे. शाह ने कहा कि जिन जवानों की पत्नियां विधवा हो गईं उनके लिए क्यों नहीं लिखते ये लोग. शाह ने कहा कि संविधान तोड़ने वालों के लिए मानवतावादी सोच रखना ठीक नहीं है.

सलवा जुडूम को लेकर जजमेंट आया

सलवा जुडूम का जजमेंट जो आया उसका कुछ लोग पक्ष लेते हैं. सलवा जुडूम की शुरूआत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने की थी. माओवादियों ने उनको मौत के घाट उतार दिया. सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि नक्सलियों के खिलाफ सलवा जुडूम गैरकानूनी है. बाद में क्या हुआ नक्सलियों ने जुडूम से जुड़े लोगों को चुन-चुनकर मार दिया. जिन्होने ये जजमेंट दिया उनको कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बनाया. यहीं कांग्रेस का दोहरा चरित्र है: अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

अस्पताल, शिक्षा और स्वास्थ्य पर हमने किया काम-शाह

अमित शाह ने कहा कि हमने बस्तर के विकास के लिए काम किया. बस्तर को बुनियादी सुविधाओं से सुरक्षित करने का काम किया. हमने 240 बिस्तरों का अस्पताल बनाया, स्वास्थ्य शिविर के लिए काम किया, 10 साल में 3 हजार करोड़ विकास के लिए दिए. एसआईएस योजना लेकर, मूलभूत सुविधाओं का विकास हो इसके लिए 4 हजार करोड़ दिए. शाह ने कहा कि हमने धमाके करने वालों को समाप्त किया इसलिए विकास अब हो रहा है.

2014 के बाद क्लीयर पॉलिसी और कठोर राजनीतिक फैसला लेकर हम आए. सेंट्रल और राज्य के बीच में समन्वय पर काम किया. केंद्रीय और राज्य पुलिस के बीच तालमेल बिठाया. सभी एजेंसियां मिलकर काम करने लगी. नेटवर्क फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम को खत्म किया. हर पंचायत में अब काम हो रहा है, बदलाव जाकर देखिए आपको नजर आएगा: अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

”भूपेश बघेल की सरकार ने माओवादियों को बचाया”

सदन को जानकारी देते हुए अमित शाह ने कहा, छत्तीसगढ़ में जब कांग्रेस की सरकार थी तब इन लोगों ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा था. उस वक्त भूपेश बघेल की सरकार थी. सरकार बदलते ही मैं वहां गया और साझा रणनीति पर बात हुई. तब मैंने कहा था कि हम पूरे देश से नक्सलवाद को खत्म करेंगे. 596 पुलिस स्टेशन नए बनाए गए. 406 नए पुलिस कैंप बनाए गए. 5 अस्पताल जवानों के लिए बनाए गए. ड्रोन से लेकर हाइटेक तकनीक का इस्तेमाल हमने माओवाद के खात्मे के लिए किया.

अमित शाह ने सदन को बताया

  • 3 साल में 706 नक्सली मारे गए
  • 3 साल में 2218 नक्सली गिरफ्तार हुए
  • 3 साल में 4839 सरेंडर हुए

ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट

अमित शाह ने कहा कि 50 किमी लंबी और चौड़ी जगह है कर्रेगुट्टा, पांच साल लड़ सकें ऐसे व्यवस्था नक्सलियों ने वहां कर रखी थी. आईईडी बनाने की फैक्ट्री वहां थी. अनाज का पूरा गोदाम बना रखा था. 45 डिग्री के तापमान में 300 एमएल पानी पीकर जवानों ने वहां ऑपरेशन किया. कई नक्सली मारे गए, कई ने सरेंडर कर दिया. हमने बड़ा हथियारों का जखीरा बरामद किया. आज 21 सेंट्रल कमेटी के मेंबर इनके समाप्त हो चुके हैं. एक बड़ा नेता इनका फरार है, उनसे से भी बात हमारी चल रही है. हथियार लेकर चलने वाले माओवादी खत्म हो चुके हैं इसका मैं भरोसा दिलाता हूं.

हम नक्सल मुक्त हो गए हैं ऐसा बोलने में मुझे कोई संकोच नहीं है: अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

कैंप में रह रही एक सरेंडर नक्सली बच्ची को जब नेल पॉलिस, लिपिस्टिक और मेंहदी एनजीओ की तरह से दी गई तो वो रो पड़ी. उसे पता नहीं था कि इसे कैसे लगाना है. सरेंडर नक्सली जब अपने माता पिता से बाजार में मिलते हैं तो कहते हैं आपने क्यों मेरा जीवन खराब किया. माता पिता भी रोते हैं. इन लोगों का भविष्य खराब करने वालों के लिए आप सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं ये अच्छी बात नहीं है: अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

अर्बन नक्सलाइट्स को बताया ह्यूमन राइट्स का चैंपियन

सदन में अमित शाह ने कहा कि माओवादियों ने करीब 15 हजार बच्चों का जीवन बर्बाद कर दिया. कैंपों में जाकर देखें इन लोगों ने कितनों का जीवन बर्बाद किया है. कुछ लोग अपने आप को ह्यूमन राइट का चैंपियन मानते हैं. ऐसे लोगों पर आप क्या कहेंगे, जो दूसरों के दुख में सुख खोजते हैं. अमित शाह ने कहा कि सरेंडर माओवादियों के लिए हमने नौकरी और रोजगार से लेकर स्किल डेवलपमेंट तक का काम किया है.

कल आपके कारनामों पर सैकड़ों पुस्तकें लिखी जाएगी उससे सबकुछ साफ हो जाएगा कि किसने क्या किया: अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

शहीद हुए जवानों को किया सैल्यूट

अमित शाह ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि मैं पूरे दृढ़ विश्वास के साथ कह सकता हूं कि नक्सलवाद खत्म हो चुका है. अब हथियारबंद कोई भी नक्सली और सेंट्रल कमेटी का मेंबर नहीं बचा है. कुछ एक जो बचे हैं उनसे से भी बात चल रही है. जल्द ही वो सरेंडर कर देंगे. शाह ने कहा कि संविधान के दायरे में रहकर जो बात करेंगे उसके लिए हम हमेशा तैयार हैं. जो निर्दोषों की हत्या करेगा, हथियार का भय दिखाएगा उसके लिए हमारे जवान हमेशा मुस्तैद हैं. शाह ने कहा कि मैं पूरे सदन की और से इस लड़ाई में शहीद हुए फोर्स के जवानों और पुलिस जवानों को उनके अदम्य साहस और कार्य के लिए सैल्यूट करता हूं.

Amit sahu
Author: Amit sahu

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