प्रधानमंत्री मोदी बोले— आकांक्षी जिला से ‘बस्तर ओलंपिक’ तक का सफर
रायपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने संबोधन के दौरान बस्तर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि जो क्षेत्र कभी आकांक्षी जिला के रूप में पहचाना जाता था, आज वही बस्तर पूरे देश में ‘बस्तर ओलंपिक’ के नाम से जाना जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की रोशनी अब बस्तर के गांव-गांव तक पहुंच चुकी है। कई गांवों में पहली बार बस सेवा शुरू हुई, जिसे ग्रामीणों ने उत्सव के रूप में मनाया।
पिछड़ेपन की सोच बदली, विकास को मिली दिशा
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय कुछ जिलों को पिछड़ा मानकर नजरअंदाज कर दिया गया था। वहां रहने वाले लोगों की बुनियादी जरूरतों तक को अनदेखा किया गया, जिससे हालात लगातार बिगड़ते चले गए। ऐसी सोच के कारण इन क्षेत्रों को पनिशमेंट पोस्टिंग के रूप में देखा जाने लगा, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और कमजोर होती गई।
उन्होंने कहा कि इस मानसिकता को बदलते हुए निर्णय लिया गया कि पिछड़े इलाकों में सक्षम, युवा और योग्य अधिकारियों की तैनाती की जाएगी और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। लगातार लिए गए ठोस फैसलों के सकारात्मक परिणाम आज देश के सामने हैं।
मुख्यमंत्री साय की प्रतिक्रिया— बस्तर छत्तीसगढ़ का सौभाग्य
प्रधानमंत्री के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है। प्राकृतिक दृष्टि से यह इलाका अत्यंत समृद्ध है और इसे धरती का स्वर्ग कहा जा सकता है। यहां कुटुमसर जैसी विश्वप्रसिद्ध गुफा, विशाल अबूझमाड़ का वन क्षेत्र, अनेक जलप्रपात और धुड़मारास जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित पर्यटन ग्राम मौजूद हैं।
नक्सलवाद से विकास की ओर बढ़ता बस्तर
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास से वंचित रहा, जबकि इसका क्षेत्रफल केरल जैसे राज्य से भी बड़ा है। अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और सुरक्षा बलों के साहस से बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति की दिशा में है और विकास ने नई रफ्तार पकड़ी है।
बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम बना नई पहचान
मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी विश्वास और उत्साह का परिणाम है कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन शुरू हुए। पिछले वर्ष बस्तर ओलंपिक में 1 करोड़ 65 लाख युवाओं ने भाग लिया, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ 91 लाख तक पहुंच गई है। बस्तर पंडुम का आयोजन भी लगातार दूसरे वर्ष किया जा रहा है।
राष्ट्रपति करेंगी शुभारंभ, अमित शाह होंगे समापन अतिथि
मुख्यमंत्री साय ने जानकारी दी कि संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ 7 तारीख को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से होगा, जबकि 9 तारीख को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में इसका समापन किया जाएगा।
भय से विश्वास तक— बस्तर की नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी बार-बार बस्तर और बस्तर ओलंपिक का उल्लेख किया जाना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। आज बस्तर भय और पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और संभावनाओं का प्रतीक बन चुका है। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि सही नीति, मजबूत नीयत और प्रभावी नेतृत्व से दशकों की उपेक्षा को भी बदला जा सकता है।















































