सुप्रीम कोर्ट का आदेश: UGC के नए नियमों पर फिलहाल रोक, याचिकाओं में कहा गया नियम असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण
नई दिल्ली। उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने के लिए 23 जनवरी 2026 को जारी किए गए UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह कदम उन याचिकाकर्ताओं के लिए राहत लेकर आया है, जिन्होंने इन नियमों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान तथा UGC एक्ट, 1956 के खिलाफ बताया था। अब इन नियमों के अमल पर अस्थायी विराम है और आगे की सुनवाई में कोर्ट तय करेगा कि ये नियम वैध हैं या नहीं।
UGC नियमों पर रोक क्यों? याचिकाओं में उठाए गए तर्क
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि नए नियम समानता के सिद्धांत के खिलाफ हैं और कुछ वर्गों को बाहर कर सकते हैं। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान भेदभाव के खतरे और दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए नियमों पर रोक लगाने का फैसला किया।
क्यों लाए UGC ने नए नियम? शिक्षा में समानता को बढ़ावा देने का प्रयास
संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, नस्ल और दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। लेकिन उच्च शिक्षण संस्थानों में आज भी भेदभाव और पक्षपात की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
इसी पृष्ठभूमि में UGC ने “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” जारी किया, जिसका मकसद था- सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए समान और निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित करना।
पहले की व्यवस्था: भेदभाव से जुड़े शिकायत तंत्र बंटे हुए थे
- SC/ST छात्रों के लिए अलग एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल
- महिलाओं के लिए अलग शिकायत तंत्र
- दिव्यांग छात्रों के लिए अलग नियम
लेकिन पूरे कैंपस में कोई साझा, समयबद्ध और प्रभावी सिस्टम नहीं था। परिणामस्वरूप कई शिकायतें दब जाती थीं या लंबित रहती थीं।
नई गाइडलाइन: EOC और Equity Committee की स्थापना
UGC ने हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में दो नई व्यवस्थाएं अनिवार्य की थीं:
- Equal Opportunity Centre (EOC): किसी भी छात्र या शिक्षक के भेदभाव की शिकायत दर्ज करने के लिए।
- Equity Committee: शिकायत की जांच और कार्रवाई की सिफारिश करने वाली समिति।
समिति में शामिल सदस्य:
- कुलपति/प्रिंसिपल (अध्यक्ष)
- SC, ST, OBC, महिला और अल्पसंख्यक/दिव्यांग प्रतिनिधि
- सीनियर प्रोफेसर/विशेषज्ञ
जिम्मेदारियां:
- शिकायत दर्ज करना
- दोनों पक्षों को सुनना
- सबूत और रिकॉर्ड जांचना
- समय पर रिपोर्ट तैयार करना
- दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की सिफारिश
विवाद की वजह: जनरल/सवर्ण वर्ग के लिए प्रतिनिधि नहीं
सोशल मीडिया और विभिन्न संगठनों ने सवाल उठाया कि सामान्य वर्ग के लिए अलग प्रतिनिधि क्यों नहीं है। इसके चलते बहस और प्रदर्शन शुरू हो गए।
इसके अलावा झूठी शिकायतों पर दंड, सजा तय करने की प्रक्रिया में अधिकार आदि मुद्दों ने विवाद को और बढ़ा दिया।
सरकार और UGC का पक्ष: समानता और भेदभाव विरोधी माहौल बनाने का प्रयास
UGC और सरकार का कहना है कि ये नियम किसी जाति या वर्ग के खिलाफ नहीं हैं। नियम SC, ST, OBC, जनरल, महिला, पुरुष, दिव्यांग और अल्पसंख्यक सभी के लिए हैं। मकसद केवल एक है—कैंपस में बराबरी और सम्मान का माहौल सुनिश्चित करना।















































