विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता हो: राज्यपाल रमेन डेका

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निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में शिक्षा, शोध और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की समीक्षा

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि विद्यार्थियों का कल्याण विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि शिक्षा के पवित्र केंद्र हैं। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक लेकर विश्वविद्यालयों में शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता समेत विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। उन्होंने विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के साथ विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

नैक ग्रेडिंग बेहतर करने की दिशा में तैयारी के निर्देश

राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों को नैक (NAAC) में बेहतर ग्रेडिंग हासिल करने के लिए आवश्यक तैयारियां समयबद्ध तरीके से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, संसाधनों और अन्य शैक्षणिक मानकों को मजबूत किया जाना जरूरी है।

उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुपात को संतुलित रखने पर भी जोर दिया। साथ ही विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास करने तथा प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम 1000 विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करने को कहा।

पीएच.डी. प्रक्रिया में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर

राज्यपाल डेका ने कहा कि पीएच.डी. उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पीएच.डी. के लिए होने वाले पंजीयनों की विशेषज्ञों के माध्यम से रैंडम चेकिंग कराई जाएगी, जिससे शोध कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जा सके।

उन्होंने विश्वविद्यालयों से केवल उपाधियां प्रदान करने तक सीमित नहीं रहने का आह्वान किया। ऐसे शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया, जिनसे समाज और देश के विकास में वास्तविक योगदान हो सके।

रोजगार की संभावनाओं वाले पाठ्यक्रमों को मिले प्राथमिकता

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में कोई नया पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले संबंधित क्षेत्र की आवश्यकता और विद्यार्थियों की रुचि का आकलन किया जाना चाहिए। इसके लिए सर्वेक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि जिन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की पर्याप्त रुचि नहीं है, उन्हें बंद करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। केवल पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाने के बजाय रोजगार और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

साइबर सिक्योरिटी और एनवायरमेंटल साइंस जैसे विषयों पर ध्यान

बैठक में राज्यपाल ने बदलते समय के अनुरूप नए और उभरते क्षेत्रों में पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा। उन्होंने एनवायरमेंटल साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे विषयों को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी विकल्प बताते हुए इन क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा

राज्यपाल रमेन डेका ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को वर्तमान शैक्षणिक जरूरतों और भविष्य के रोजगार अवसरों को ध्यान में रखते हुए अपने पाठ्यक्रमों में आवश्यक बदलाव करने चाहिए।

उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और रोजगारपरक शिक्षा को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने की अपेक्षा व्यक्त की।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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