श्री श्याम मंदिर में गूंजी भागवत कथा की ज्ञानधारा, गोवर्धन लीला और रुक्मणी विवाह का हुआ जीवंत वर्णन

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पंडित भारत भूषण शास्त्री ने भक्तों को सुनाया भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का प्रसंग, रुक्मणी विवाह में महिलाओं ने निभाई बारात की भूमिका

रायगढ़, 24 अगस्त। श्री श्याम सरकार महिला मंडल द्वारा श्री श्याम मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान कथा में रायगढ़ अंचल के प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित श्री भारत भूषण शास्त्री ने गोवर्धन लीला और रुक्मणी विवाह का जीवंत वर्णन किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे पंडाल में भक्ति का वातावरण बना रहा।

गोवर्धन पूजा का सुनाया प्रसंग

पंडित भारत भूषण शास्त्री ने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए बताया कि ब्रजवासियों के मन में भगवान इंद्र को लेकर भय था। उन्हें आशंका थी कि यदि इंद्र देव वर्षा नहीं करेंगे तो फसलें नष्ट हो जाएंगी और मनुष्य एवं पशु-पक्षियों के सामने जल संकट उत्पन्न हो जाएगा।

भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि उन्हें इंद्र की जगह गिरिराज गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए। श्रीकृष्ण की बात मानकर ब्रजवासियों ने गिरिराज जी की पूजा की।

श्रीकृष्ण ने उंगली पर उठाया गोवर्धन पर्वत

कथा के अनुसार ब्रजवासियों द्वारा इंद्र की पूजा न किए जाने से क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों एवं उनके पशुधन को पर्वत के नीचे सुरक्षित स्थान प्रदान किया।

भगवान श्रीकृष्ण की लीला देखकर इंद्र का अहंकार समाप्त हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी। इसके बाद उन्होंने ब्रजवासियों को परेशान नहीं करने का संकल्प लिया।

कंस वध की कथा ने बांधा समां

गोवर्धन लीला के बाद कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन और कंस वध का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कंस ने मल्ल युद्ध के बहाने श्रीकृष्ण और बलराम को मथुरा बुलाने की योजना बनाई थी।

कथा में बताया गया कि मथुरा पहुंचने के बाद श्रीकृष्ण ने कंस की ओर से रचे गए षड्यंत्रों का सामना किया और अंत में कंस का वध कर अत्याचार का अंत किया।

रुक्मणी के हृदय में विराजते थे श्रीकृष्ण

इसके बाद पंडित भारत भूषण शास्त्री ने रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कुंदक राज्य के राजा की पुत्री रुक्मणी के हृदय में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान थे। हालांकि उनके भाई रुक्म ने रुक्मणी का विवाह अपने मित्र शिशुपाल से तय कर दिया था।

रुक्मणी ने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उनसे विवाह की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद जब रुक्मणी गौरी पूजन के लिए मंदिर गईं, तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें अपने साथ द्वारका ले आए और दोनों का विवाह संपन्न हुआ।

महिलाओं ने निभाई बारात की भूमिका

कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग के दौरान श्री श्याम सरकार महिला मंडल की अध्यक्ष संगीता शर्मा सहित प्रिया शर्मा, रीना पालीवाल, नंदिनी गोयल, मोनिका अग्रवाल, कविता अग्रवाल, मनीषा मोदी, भारती मोदी, प्रियंका सिंघानिया, नंदिनी अग्रवाल, चंद्रकला अग्रवाल, प्रतिमा अग्रवाल, मंजू अग्रवाल, मंजू बोदिया, संगीता जिंदल, संगीता सरोगी, सुमन अग्रवाल, बबीता गेरा, किरण शर्मा, करीमा अग्रवाल और बबीता अग्रवाल ने विवाह गीतों पर नृत्य करते हुए बारात की भूमिका निभाई।

श्रद्धालुओं तक पहुंचाई कथा की पूरी जानकारी

कथा स्थल पर किसी कारणवश उपस्थित नहीं हो सके श्रद्धालुओं के लिए विमल चौधरी ने अपनी लेखनी के माध्यम से संपूर्ण कथा का विवरण प्रस्तुत किया।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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