E20 Petrol : केंद्र सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर अफवाहों पर दिया स्पष्टीकरण, कहा- सुरक्षा को लेकर चिंता निराधार

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम और E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों पर फैल रहे दावों को भ्रामक बताते हुए तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल की सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे सवाल वैज्ञानिक परीक्षणों, उद्योग के अनुभव और वास्तविक आंकड़ों पर आधारित नहीं हैं।

E20 से बड़े पैमाने पर इंजन खराबी का कोई प्रमाण नहीं

सरकार के अनुसार, देश में E15+ ईंधन का उपयोग साढ़े तीन साल से अधिक समय से और E19-E20 ईंधन का उपयोग ढाई साल से अधिक समय से किया जा रहा है। इस दौरान एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े स्तर पर इंजन खराब होने या वाहनों के बंद होने की कोई प्रमाणित घटना सामने नहीं आई है।

2001 में शुरू हुआ था एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम

केंद्र सरकार ने बताया कि भारत में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2006 में E5 मिश्रण शुरू किया गया और धीरे-धीरे एथेनॉल की मात्रा बढ़ाई गई। वर्ष 2025-26 में नवंबर से जून तक औसत एथेनॉल मिश्रण 20 प्रतिशत तक पहुंच गया।

करोड़ों वाहनों में हो चुका है उपयोग

सरकार ने कहा कि देश में रोजाना करीब 8 करोड़ वाहन पेट्रोल पंपों पर आते हैं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत पेट्रोल वाहन हैं। वाहन सर्विसिंग के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार ने बताया कि पुराने वाहनों में भी E20 से संबंधित जंग, असामान्य घिसाव या पार्ट्स की उम्र कम होने जैसी कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है।

E20 लागू करने से पहले हुआ व्यापक परीक्षण

सरकार के अनुसार, E20 लागू करने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों, SIAM, ARAI, कंपोनेंट निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों और तेल कंपनियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई थी। ईंधन की गुणवत्ता, इंजन की अनुकूलता, प्रदर्शन और उत्सर्जन जैसे सभी पहलुओं की वैज्ञानिक जांच के बाद इसे लागू किया गया।

30 करोड़ वाहन खराब होने का दावा गलत

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 के कारण करीब 30 करोड़ वाहन अनुपयोगी होने का दावा सही नहीं है। सरकार के अनुसार, E15+ और E19-E20 ईंधन पर 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें चल चुकी हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर खराबी का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

वाहन कंपनियों ने भी जताया भरोसा

सरकार ने बताया कि कई प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने E20 कार्यक्रम का समर्थन किया है। कंपनियों का कहना है कि E20 को कठोर परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर लागू किया गया है।

माइलेज में कमी सीमित, कई फायदे भी

सरकार ने कहा कि E20 से माइलेज में संभावित कमी कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे वाहन की स्थिति, ड्राइविंग शैली, ट्रैफिक, टायर प्रेशर और रखरखाव। वहीं एथेनॉल मिश्रण से बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, स्वच्छ दहन और उत्सर्जन में कमी जैसे लाभ भी मिलते हैं।

केंद्र सरकार ने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियां E20 ईंधन के लिए वारंटी जारी रखे हुए हैं, जो इसके परीक्षण और वास्तविक उपयोग के अनुभव पर उनके भरोसे को दर्शाता है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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