Bilaspur High Court : हत्या मामले की फाइल गायब होने पर हाईकोर्ट सख्त, रायपुर जिला एवं सत्र न्यायाधीश से मांगा जवाब

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16 साल से जेल में बंद आजीवन कारावास के कैदी की सजा माफी याचिका रिकॉर्ड गायब होने से लंबित, एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले की मूल न्यायालयीन फाइल गायब होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामला आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी की सजा माफी याचिका से जुड़ा है, जो मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण लंबे समय से लंबित है। हाईकोर्ट ने रायपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से एक सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

16 वर्षों से जेल में बंद है कैदी

मामले के अनुसार, नवाब खान उर्फ डैनी उर्फ बाबा खान वर्ष 2011 में हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया था। उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। वर्तमान में वह करीब 16 वर्षों से जेल में बंद है और उसने सजा में छूट (रिमिशन) के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है।

मूल रिकॉर्ड गायब होने से अटका मामला

सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया कि जेल अधीक्षक द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने पर रायपुर जिला एवं सत्र न्यायालय के सक्षम अधिकारी ने लिखित रूप से सूचित किया कि मामले का मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और उसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसी कारण सजा माफी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने प्रशासनिक लापरवाही को गंभीर मानते हुए कहा कि रिकॉर्ड गायब होने के कारण किसी कैदी की सजा माफी याचिका वर्षों तक लंबित रहना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने पूछा कि वर्ष 2011 के इस मामले का मूल रिकॉर्ड आखिर गायब कैसे हुआ।

एक सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने रायपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड तलाशकर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें। यदि रिकॉर्ड नहीं मिलता है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी भी अगली सुनवाई 29 जुलाई 2026 तक अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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