Chhattisgarh High Court : कोयला ब्लॉक रद्द होने पर स्टांप शुल्क वापसी का रास्ता साफ, राजस्थान विद्युत निगम को मिली राहत

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हाईकोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसले से माइनिंग लीज प्रभावहीन हुई तो स्टांप शुल्क वापसी का दावा स्वीकार्य

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन निरस्त होने के बाद जमा किए गए स्टांप शुल्क की वापसी के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण मूल माइनिंग लीज कानूनी रूप से प्रभावहीन हो गई, तो उस पर जमा स्टांप शुल्क और उपकर की वापसी का दावा भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत किया जा सकता है।

PEKB कोल ब्लॉक से जुड़ा है मामला

यह मामला सरगुजा जिले के परसा ईस्ट एवं कांता बसन (PEKB) कोल ब्लॉक से जुड़ा है। कंपनी ने वर्ष 2012 में 30 वर्ष की माइनिंग लीज के लिए करीब 27.97 करोड़ रुपये स्टांप शुल्क, उपकर और पंजीयन शुल्क के रूप में जमा किए थे।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के कोयला ब्लॉक आवंटन को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद कंपनी को नई माइनिंग लीज के लिए दोबारा स्टांप शुल्क और अन्य शुल्क जमा करना पड़ा।

हाईकोर्ट ने माना- पूर्व स्थिति बहाल करने का अधिकार

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद मूल माइनिंग लीज का आधार समाप्त हो गया था। ऐसे में कंपनी स्टांप शुल्क और उस पर लगाए गए उपकर की वापसी की हकदार है।

कोर्ट ने भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 65 के तहत रेस्टिट्यूशन (पूर्व स्थिति में बहाली) के सिद्धांत को भी लागू माना।

23.23 करोड़ रुपये ब्याज सहित लौटाने के निर्देश

हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंजीयन शुल्क की वापसी का दावा स्टांप अधिनियम के तहत स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि इसके लिए अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं है।

हाईकोर्ट ने स्टांप कलेक्टर के 25 नवंबर 2019 के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि कंपनी को 23.23 करोड़ रुपये स्टांप शुल्क की राशि नियमानुसार ब्याज सहित वापस की जाए। संबंधित प्राधिकारी को आदेश की प्रति प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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