रायपुर। राज्य शासन ने विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थाओं, सहकारी बैंकों, सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं के लिए शासकीय भूमि आवंटन से जुड़े मामलों के त्वरित और पारदर्शी निराकरण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में मंत्रालय (महानदी भवन) में शासकीय भूमि आवंटन संबंधी विचारार्थ अंतरविभागीय समिति की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई अहम प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तृत मंथन
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी के मार्गदर्शन में विचारार्थ प्रकरण सूची पर समीक्षा की गई। बैठक में कुल 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया गया। इनमें आवासीय प्रयोजन, बैंक शाखा भवन, सामाजिक भवन, विद्यालय, ऑडिटोरियम निर्माण तथा विभिन्न संस्थाओं को शासकीय भूमि आवंटन से जुड़े मामले शामिल रहे।
विभिन्न जिलों के प्रस्तावों की हुई गहन समीक्षा
बैठक के दौरान रायपुर, धमतरी, कवर्धा और जगदलपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्राप्त भूमि आवंटन प्रस्तावों का परीक्षण किया गया। इस दौरान विभागीय परीक्षण रिपोर्ट, अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC), ऑडिट संबंधी दस्तावेज और अन्य विधिक अभिलेखों की बारीकी से जांच की गई। अधिकारियों ने संकेत दिया कि सभी औपचारिकताओं के पूर्ण होने के बाद इन मामलों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
समयबद्ध और पारदर्शी निराकरण के निर्देश
सचिव शम्मी आबिदी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रकरणों की तथ्यात्मक और विधिसम्मत तैयारी निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाए, ताकि जनहित से जुड़े मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी न हो।
जनहित और विकास कार्यों को मिलेगी गति
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनहित से जुड़े कार्यों और विकास परियोजनाओं के लिए शासकीय भूमि का पारदर्शी एवं नियमसम्मत उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि हर प्रस्ताव का विधिक, प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं के आधार पर गंभीर परीक्षण किया जाएगा।















































