मानवता की मिसाल: अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने उठाया जिम्मा, अनाथ बेटी रोहिणी दत्ता का विवाह करवा रहा संगठन

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अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद द्वारा स्वर्गीय पूर्व सैनिक समीर दत्ता एवं स्वर्गीय गंगाबाई दत्ता की पुत्री कुमारी रोहिणी दत्ता का विवाह संपन्न कराया जा रहा है।
कोंडागांव। समाज सेवा और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद कोंडागांव द्वारा मानवीय पहल की जा रही है। स्वर्गीय पूर्व सैनिक समीर दत्ता एवं स्वर्गीय गंगाबाई दत्ता की पुत्री कुमारी रोहिणी दत्ता का विवाह 21 अप्रैल को उमरगांव में संपन्न कराया जा रहा है। यह आयोजन न केवल एक विवाह है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।माता-पिता के निधन के बाद संगठन बना सहारा
उल्लेखनीय है कि कुमारी रोहिणी दत्ता एवं उनकी बहन कुमारी बबीता दत्ता के माता-पिता का निधन हो चुका है। उनके पिता स्वर्गीय समीर दत्ता पूर्व सैनिक थे। वर्ष 2020 में संगठन के गठन के बाद से परिषद द्वारा दोनों बच्चियों को गोद लेकर उनके पालन-पोषण, शिक्षा और आवश्यक जरूरतों की पूर्ति में निरंतर सहयोग किया जा रहा है।

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आर्थिक स्थिति कमजोर, फिर भी सम्मानपूर्वक विवाह का संकल्प
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण विवाह जैसे महत्वपूर्ण दायित्व को निभाना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद कोंडागांव ने आगे बढ़कर सामाजिक दायित्व निभाते हुए कुमारी रोहिणी दत्ता के विवाह की संपूर्ण जिम्मेदारी उठाई है। यह आयोजन उमरगांव में सादगी और गरिमा के साथ संपन्न होगा।

पूर्व सैनिकों का सेवा भाव समाज के लिए प्रेरणा
देश की रक्षा के बाद अब समाज सेवा में समर्पित पूर्व सैनिकों का यह प्रयास दर्शाता है कि सेवा की भावना वर्दी के साथ समाप्त नहीं होती। यह पहल बताती है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो समाज के कमजोर वर्गों को भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दिया जा सकता है।

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समाज से सहभागिता और आशीर्वाद की अपील
परिषद ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर सपरिवार उपस्थित होकर नवदंपति को आशीर्वाद प्रदान करें। संगठन का मानना है कि समाज के सहयोग और सहभागिता से ही ऐसे पुनीत कार्य सफल होते हैं और जरूरतमंदों को संबल मिलता है।

सामाजिक समरसता और सेवा का संदेश
यह पहल समाज में एक सकारात्मक संदेश देती है कि यदि संगठित होकर प्रयास किया जाए, तो किसी भी जरूरतमंद परिवार की मदद की जा सकती है। पूर्व सैनिकों द्वारा उठाया गया यह कदम सेवा, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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