रायपुर, 13 अप्रैल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और मैदानी इलाकों में पेयजल का प्रमुख स्रोत बने हैंडपंप अब खुद संकट में हैं। पर्याप्त संख्या में तकनीशियन नहीं होने से गर्मी के दिनों में हैंडपंपों की मरम्मत और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
स्वीकृत पद 800 से अधिक, कार्यरत सिर्फ आधे
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुसार प्रदेश के 33 जिलों में हैंडपंप तकनीशियन के 872 से 876 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 462 तकनीशियन ही कार्यरत हैं। यानी 400 से अधिक पद खाली पड़े हैं।
इस कमी के कारण हैंडपंपों के रखरखाव और मरम्मत की व्यवस्था कमजोर पड़ गई है, जिसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है।
एक तकनीशियन पर 10-12 गांवों की जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक, एक हैंडपंप तकनीशियन को 10 से 12 गांवों के हैंडपंप की देखरेख का जिम्मा दिया गया है।
ऐसे में जब कोई हैंडपंप खराब होता है, तो शिकायत के बावजूद उसकी मरम्मत समय पर नहीं हो पाती। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है, खासकर गर्मी के मौसम में।
जलस्तर गिरने से बढ़ी चुनौती
गर्मी के कारण जलस्तर में गिरावट आ रही है, जिससे हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही है।
साथ ही, पानी शुद्धिकरण के लिए आवश्यक केमिकल डालने का काम भी तकनीशियन की कमी के चलते प्रभावित हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद और बढ़ेगी समस्या
आने वाले समय में कई तकनीशियन सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिससे यह कमी और बढ़ने की आशंका है।
वहीं दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंपों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे मौजूदा व्यवस्था पर और दबाव बढ़ रहा है।
सेटअप रिवाइज करने की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान हालात को देखते हुए तकनीशियन के पदों का पुनर्मूल्यांकन (सेटअप रिवाइज) किया जाना चाहिए।
उनका मानना है कि जब तक रिक्त पदों को भरा नहीं जाएगा और व्यवस्था मजबूत नहीं की जाएगी, तब तक ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट से राहत मिलना मुश्किल है।
हैंडपंप जैसे बुनियादी जलस्रोत की उपेक्षा ग्रामीण जीवन को सीधे प्रभावित कर रही है। यदि जल्द ही तकनीशियन की नियुक्ति और संसाधनों में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर रूप ले सकता है।















































