CBSE Schools Book List Controversy: निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान, महंगी किताबों ने बढ़ाया बोझ

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रायपुर, 13 अप्रैल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही Central Board of Secondary Education से जुड़े निजी स्कूलों में किताबों को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। अभिभावकों को लंबी-चौड़ी बुक लिस्ट के साथ खास दुकानों से ही खरीदारी के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।


किताबों की सूची के साथ ‘फिक्स दुकान’ का दबाव

अभिभावकों का आरोप है कि कई निजी स्कूल सीधे किताबों की सूची देने के बजाय एक तय पुस्तक विक्रेता का नाम और पता दे रहे हैं। वहां पहले से तैयार बुक सेट अभिभावकों को थमा दिया जाता है।

यदि कोई अभिभावक केवल चुनिंदा किताबें खरीदना चाहता है, तो उसे टाल दिया जाता है। मजबूरी में उन्हें पूरा सेट अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर खरीदना पड़ रहा है, जबकि अन्य दुकानों से 15 से 20 प्रतिशत तक छूट मिल सकती है।


महंगी किताबें और सीमित विकल्प

जांच में सामने आया कि एक ही तरह के कागज और कंटेंट वाली किताबों की कीमतें अलग-अलग प्रकाशकों के कारण काफी भिन्न हैं। उदाहरण के तौर पर राइटिंग बुक 80 रुपए से लेकर 350 से 400 रुपए तक बिक रही है।

किताब विक्रेताओं के अनुसार, लगभग 30 प्रतिशत किताबें ऐसी होती हैं जिनका उपयोग बेहद सीमित रहता है, जैसे एटलस, डिक्शनरी और अतिरिक्त अभ्यास पुस्तिकाएं।


छोटे बदलाव के नाम पर हर साल नई किताबें

निजी प्रकाशक हर साल किताबों में मामूली बदलाव कर उन्हें नया संस्करण बताकर बेचते हैं, जिससे पुरानी किताबें उपयोग में नहीं आ पातीं।

कई स्कूल एक्स्ट्रा करिकुलम के नाम पर अतिरिक्त किताबें भी शामिल कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों का खर्च और बढ़ जाता है।


नियम क्या कहते हैं

National Council of Educational Research and Training के अनुसार, पाठ्यक्रम के आधार पर किताबें प्रकाशित होती हैं। हाल ही में जारी जानकारी के मुताबिक केवल कक्षा 9 की किताबों में ही संशोधन की प्रक्रिया चल रही है।

इसके अलावा किसी भी बोर्ड द्वारा किसी विशेष दुकान को अधिकृत नहीं किया जाता।


प्रशासन की स्पष्ट चेतावनी

जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने स्पष्ट किया है कि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दुकान से किताबें खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि किसी स्कूल द्वारा दबाव बनाया जाता है, तो इसकी शिकायत की जा सकती है।


स्कूलों का पक्ष

निजी स्कूल संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता का कहना है कि स्कूल केवल मार्गदर्शन देते हैं और किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं करते।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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