रायगढ़। जिले का प्रतिष्ठित किरोड़ीमल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT), जो कभी मध्यमवर्गीय और गरीब छात्रों के लिए इंजीनियरिंग शिक्षा की सबसे बड़ी उम्मीद माना जाता था, आज गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक संकट में घिर गया है। श्रम न्यायालय ने संस्थान की संपत्ति कुर्क कर करीब एक करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया है, ताकि कर्मचारियों का लंबित वेतन चुकाया जा सके।
चार साल से वेतन बंद, 40 कर्मचारियों ने लगाया न्यायालय का दरवाजा
संस्थान के लगभग 40 कर्मचारियों ने लेबर कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पिछले चार वर्षों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने लगभग एक करोड़ रुपये बकाया वेतन की मांग की थी।
श्रम न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद 21 अप्रैल 2026 को आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होता, तब तक संस्थान की संपत्ति को कुर्क रखा जाए।
इसके बाद अदालत ने 5 मई को कुर्की वारंट जारी किया और 11 मई तक कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित है।
प्रशासनिक ढांचे और उपयोग पर भी उठे सवाल
वर्तमान समय में किरोड़ीमल इंस्टीट्यूट का उपयोग केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गया है। जानकारी के अनुसार—
- प्रशासनिक भवन को शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय को सौंप दिया गया है
- परिसर में नवसंकल्प संस्थान को गुरुकुल संचालन हेतु कक्ष दिए गए हैं
- हॉस्टल भवन का उपयोग अन्य छात्राओं के ठहरने के लिए किया जा रहा है
- उद्यानिकी कॉलेज और रिसर्च सेंटर के लिए सेकंड फ्लोर आवंटित किया गया है
- नर्सिंग कॉलेज के लिए भी पांच कमरे दिए जा रहे हैं
- प्रयास आवासीय विद्यालय के लिए परिसर का एक हिस्सा उपयोग में लिया जा रहा है
इन बदलावों के बीच संस्थान के मूल स्टाफ के पास सीमित संसाधन बचे हैं और कई कर्मचारी भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
AICTE फंड से बना हॉस्टल भी विवादों में
सूत्रों के अनुसार, छात्रों के लिए हॉस्टल निर्माण हेतु AICTE (All India Council for Technical Education) द्वारा फंड जारी किया गया था। यह हॉस्टल मूल रूप से इंजीनियरिंग छात्रों के लिए तैयार किया जाना था, लेकिन वर्तमान में इसका उपयोग अन्य शैक्षणिक गतिविधियों और गुरुकुल की छात्राओं के आवास के रूप में किया जा रहा है।
इसी तरह परिसर में बाथरूम निर्माण और अन्य संरचनात्मक बदलाव भी किए जा रहे हैं, जिनका उपयोग अलग-अलग संस्थानों द्वारा किया जा रहा है।
प्रबंधन और सिस्टम पर गंभीर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बन गया है कि कैसे एक प्रमुख तकनीकी संस्थान वित्तीय संकट में पहुंचा। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्षों से प्रशासनिक लापरवाही और प्रबंधन की अनदेखी के कारण संस्थान की स्थिति लगातार बिगड़ती गई।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजरें 18 जून की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि कुर्की की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी और कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन कब तक मिल पाएगा।















































