पश्चिम एशिया संकट का असर: भारत में LPG सिलेंडर 29 रुपये महंगा, सरकार ने बताई वजह और राहत व्यवस्था

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उछाल का सीधा असर भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 46% तक कीमतें बढ़ने के कारण घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। सरकार का कहना है कि इसके बावजूद भारत में गैस उपभोक्ताओं को दुनिया के कई देशों की तुलना में सस्ती दरों पर LPG मिल रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेज उछाल, संकट बना वजह

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन बाधाओं के चलते एलपीजी की वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। फरवरी में जहां सऊदी बेंचमार्क कीमत करीब 543 डॉलर प्रति टन थी, वहीं यह जून तक बढ़कर लगभग 790 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई। यानी करीब 46% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इसी बढ़ी हुई लागत का असर भारत के आयात बिल पर पड़ा है, क्योंकि देश अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

सरकार का दावा: हर सिलेंडर पर 700 रुपये का बोझ खुद उठा रही है

सरकारी जानकारी के अनुसार, घरेलू एलपीजी की वास्तविक सप्लाई लागत लगभग 1600 रुपये प्रति सिलेंडर से भी अधिक है, जबकि उपभोक्ताओं को यह करीब 942 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसका मतलब है कि सरकार और तेल कंपनियां प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये का बोझ खुद वहन कर रही हैं, ताकि आम लोगों पर पूरा भार न पड़े।

उज्ज्वला लाभार्थियों को अतिरिक्त राहत

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी दी जा रही है। यह सब्सिडी साल में पहले चार रिफिल तक लागू होती है। इसके चलते उज्ज्वला उपभोक्ताओं के लिए प्रभावी कीमत और कम हो जाती है।

सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था गरीब और ग्रामीण परिवारों को राहत देने के लिए जारी रखी गई है।

भारत में कीमतें अब भी कई देशों से कम

सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद भारत में घरेलू LPG की कीमतें अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों की तुलना में काफी कम हैं। साथ ही पड़ोसी देशों की तुलना में भी भारत में रसोई गैस अपेक्षाकृत सस्ती उपलब्ध कराई जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय कीमतें तय करती हैं घरेलू रेट

भारत में LPG की कीमतें मुख्य रूप से सऊदी अरामको के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस पर आधारित होती हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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