प्रतिबंधित इंजन वाला हार्वेस्टर बेचने पर कंपनी को झटका, उपभोक्ता आयोग ने दिया बड़ा आदेश

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जांजगीर-चांपा | बीएस-3 इंजन वाले हार्वेस्टर की बिक्री को माना सेवा में कमी, कंपनी पर कड़ा फैसला

सक्ती जिले के ग्राम बड़े सीपत के कृषक कृष्णा साहू द्वारा खरीदे गए हार्वेस्टर मामले में जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर ने बड़ा निर्णय सुनाया है। आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए मेसर्स सत करतार एग्रो इंजीनियरिंग कंपनी भोपाल के खिलाफ आदेश पारित किया है।

कृष्णा साहू ने वर्ष 2022 में कंपनी से AMAN955 SELF PROPELLED COMBINE HARVESTER 22,50,000 रुपये में खरीदा था। आरोप है कि कंपनी ने उन्हें वास्तविक जानकारी दिए बिना प्रतिबंधित बीएस-3 इंजन वाला हार्वेस्टर बेच दिया।

पंजीयन और आरसी कार्ड न देने पर शुरू हुआ विवाद

शिकायत के अनुसार कंपनी द्वारा कई वर्षों तक हार्वेस्टर का पंजीयन और आरसी कार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। बाद में कृषक को जानकारी मिली कि मशीन में बीएस-3 श्रेणी का इंजन लगा है, जिसका विक्रय प्रतिबंधित है।

कंपनी के प्रोपराइटर गुरुचरण सिंह और उनके पुत्र अमनप्रीत सिंह (मैनेजर) पर आरोप है कि उन्होंने आश्वासन देकर मामला टालते रहे, लेकिन न तो इंजन बदला गया और न ही पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की गई।

उपभोक्ता आयोग में दायर हुआ मामला, सेवा में कमी साबित

कृष्णा साहू ने अधिवक्ता साकेत केसरवानी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर में परिवाद दायर किया। आयोग ने सुनवाई के बाद 23 मार्च 2026 को आदेश पारित करते हुए मामले को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।

आयोग ने पाया कि कंपनी ने 20 अक्टूबर 2022 को हार्वेस्टर की बिक्री करते समय वास्तविक स्थिति छिपाई थी, जो अनुचित व्यापार पद्धति को दर्शाता है।

कंपनी को 45 दिन में बीएस-4 इंजन लगाने या पूरी राशि लौटाने का आदेश

आयोग ने आदेश दिया है कि कंपनी 45 दिनों के भीतर अपने खर्च पर हार्वेस्टर में बीएस-4 श्रेणी का नया इंजन लगाकर दे। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो कंपनी को 22,50,000 रुपये की पूरी बिक्री राशि 20 अक्टूबर 2022 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटानी होगी।

मानसिक क्षति और परिवाद व्यय का भी भुगतान आदेश

उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को मानसिक एवं शारीरिक क्षति के लिए 1,00,000 रुपये और परिवाद व्यय के रूप में 10,000 रुपये देने का आदेश भी दिया है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया, तो पूरी राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

 

Amit sahu
Author: Amit sahu

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