बिलासपुर: जिले के उपभोक्ता फोरम ने एलआईसी (LIC) को झटका देते हुए मृतक के परिवार को बीमा राशि, एक्सीडेंटल क्लेम और हर्जाना देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि ग्रेस पीरियड (प्रीमियम भरने का अतिरिक्त समय) के दौरान हुई मौत पर क्लेम रोकने की एलआईसी की कार्रवाई गलत थी.
क्या था पूरा मामला?
रतनपुर के मदनपुर इलाके में रहने वाले संत कुमार वैष्णव ने एलआईसी की ‘जीवन लक्ष्य पॉलिसी’ ली थी. इस पॉलिसी में 3 लाख का मूल बीमा और 3 लाख का एक्सीडेंटल डेथ राइडर (ADDB) शामिल था. इसी बीच 27 जनवरी 2025 को एक सड़क हादसे में संत कुमार की मौत हो गई.
एलआईसी ने क्यों रोका क्लेम?
जब मृतक के भाई प्रदीप कुमार ने क्लेम के लिए आवेदन किया, तो एलआईसी ने इसे खारिज कर दिया. कंपनी का तर्क था कि दिसंबर 2024 की तिमाही किस्त समय पर नहीं भरी गई थी, जिससे ग्रेस पीरियड खत्म हो गया और पॉलिसी लैप्स (बंद) हो चुकी थी. इसके बाद परिवार ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया.
कोर्ट ने कानून समझाते हुए क्या कहा?
फोरम ने पॉलिसी के नियमों की बारीकी से जांच की. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि 30 दिनों के ग्रेस पीरियड की गिनती प्रीमियम की आखिरी तारीख के अगले दिन से शुरू होती है. इस हिसाब से हादसे के दिन (27 जनवरी 2025) तक पॉलिसी पूरी तरह चालू और वैध थी. ग्रेस पीरियड में मौत होने पर कंपनी क्लेम देने से मना नहीं कर सकती.
अब एलआईसी को क्या-क्या देना होगा?
फोरम ने एलआईसी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है. इसमें मूल बीमा राशि 3 लाख रुपए और दुर्घटना लाभ 3 लाख अलग से देना होगा. इसके अलावा ब्याज के रूप में क्लेम की तारीख (17 नवंबर 2025) से भुगतान के दिन तक 9% सालाना ब्याज भी देने का आदेश है. वहीं मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना 25,000 और कोर्ट का खर्च 5,000 भी LIC को देना होगा.















































