लाल आतंक का अंत!: 108 नक्सलियों का सरेंडर, सिर पर था 3.29 करोड़ का इनाम; सबसे बड़ा डंप भी बरामद

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Naxal Surrender News: जगदलपुर में ‘पूना मारगेम’ पहल के तहत डीकेएसजेडसी के 108 माओवादी कैडरों ने हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। बस्तर आईजी ने 31 मार्च की डेडलाइन से पहले मुख्यधारा में आने की अपील की है।

बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बुधवार को नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास की एक बड़ी घटना सामने आई। पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के 108 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। समर्पित नक्सलियों में 44 महिला और 64 पुरुष नक्सली शामिल हैं। इन सभी पर 3.29 करोड़ का इनाम घोषित हैँ.

आत्मसमर्पण कार्यक्रम राज्य के डीजीपी अरुण देव गौतम, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, बस्तर आईजी सुंदरराज पी सहित सीआरपीएफ, बीएसएफ और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित किया गया।
नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा डंप बरामद
इस दौरान नक्सलियों द्वारा जमा किए गए हथियारों और अन्य सामग्री की भी प्रदर्शनी लगाई गई। अधिकारियों ने बताया कि 101 घातक हथियार जिनमें, एके47, इंसास, एलएमजी, बीजीएल बरामद किये गये हैं। देश के नक्सल इतिहास में पहली बार 3.61 करोड़ रुपये नकद, 1.64 करोड़ मूल्य के एक किलो सोना बरामद किया गया है। अन्य सामग्री बरामद की गई है। इसे अब तक के नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे बड़ी डंप बरामदगी माना जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सभी डंप और सामग्री बस्तर रेंज के अलग-अलग जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर में चलाए गए अभियानों के दौरान बरामद की गई थी। इन सभी को जगदलपुर स्थित रेंज मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के चलते बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। यह आत्मसमर्पण बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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