भारतीय पारंपरिक परिधानों में साड़ी का अपना विशेष स्थान है, लेकिन महाराष्ट्र की नौवारी साड़ी (Nauvari Saree) अपनी अनूठी पहनने की शैली और ऐतिहासिक पहचान के कारण सबसे अलग मानी जाती है। करीब नौ गज लंबी इस साड़ी को पहनने का तरीका धोती जैसा होता है, जिससे महिलाओं को चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में आसानी होती है। यही वजह है कि सदियों से नौवारी साड़ी मराठी महिलाओं की संस्कृति, परंपरा और आत्मसम्मान का प्रतीक बनी हुई है।
हाल ही में अभिनेत्री श्रद्धा कपूर की फिल्म ‘ईठा’ के ट्रेलर में भी नौवारी साड़ी की खास झलक देखने को मिली। इस फिल्म में श्रद्धा मशहूर लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की भूमिका निभा रही हैं। ट्रेलर में नौवारी साड़ी को मराठी महिलाओं की पहचान, सम्मान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।
क्या होती है नौवारी साड़ी?
नौवारी का अर्थ है नौ वार यानी नौ गज। सामान्य साड़ी की तुलना में इसकी लंबाई अधिक होती है। इसे पहनने के लिए पेटीकोट की आवश्यकता नहीं होती और इसका निचला हिस्सा धोती की तरह पैरों के बीच से निकालकर पीछे की ओर खोंसा जाता है।
इस पहनावे में महिलाएं आसानी से चल सकती हैं और शारीरिक गतिविधियां भी कर सकती हैं। पुराने समय में यह शैली विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए उपयोगी थी, जिन्हें घरेलू कामों के साथ खेती और अन्य मेहनत वाले काम भी करने पड़ते थे।
क्या है नौवारी साड़ी का इतिहास?
नौवारी साड़ी का इतिहास महाराष्ट्र की पारंपरिक जीवनशैली और मराठा संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि पुराने समय में महिलाओं ने सुविधा और सक्रिय जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए साड़ी पहनने की इस शैली को अपनाया।
मराठा काल में भी इस तरह के परिधान का प्रचलन रहा। ऐतिहासिक चित्रों और सांस्कृतिक परंपराओं में महिलाओं को नौवारी शैली में देखा जा सकता है। समय के साथ यह पहनावा महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान बन गया।
धोती की तरह पहनने का है खास अंदाज
नौवारी साड़ी पहनने का तरीका इसे दूसरे पारंपरिक परिधानों से अलग बनाता है।
- सबसे पहले साड़ी के एक हिस्से को कमर पर लपेटा जाता है।
- इसके बाद कपड़े को पैरों के बीच से निकालकर पीछे की ओर खोंसा जाता है।
- साड़ी के बाकी हिस्से को कमर पर लपेटकर पल्लू कंधे पर रखा जाता है।
- कुछ शैलियों में पल्लू को सिर पर भी लिया जाता है।
इस तरह साड़ी पहनने से पैरों को पर्याप्त जगह मिलती है और चलने-फिरने में सुविधा रहती है।
मराठी महिलाओं की पहचान और सम्मान का प्रतीक
नौवारी साड़ी केवल एक पारंपरिक वस्त्र नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गणेशोत्सव, गुड़ी पड़वा, विवाह समारोह और अन्य पारंपरिक आयोजनों में महिलाएं इसे विशेष रूप से पहनती हैं।
लावणी नृत्य में भी नौवारी साड़ी का खास महत्व है। इसके पारंपरिक अंदाज, आकर्षक पल्लू और विशेष पहनावे से नृत्य की प्रस्तुति में अलग ही रंग देखने को मिलता है।
आज भी कायम है नौवारी साड़ी का आकर्षण
आधुनिक फैशन के दौर में भी नौवारी साड़ी का आकर्षण कम नहीं हुआ है। आज इसे पारंपरिक आभूषणों, नथ, हरे रंग की चूड़ियों और पारंपरिक हेयर स्टाइल के साथ पहना जाता है। फैशन की दुनिया में भी इसके नए डिजाइन और पहनने के आधुनिक तरीके लोकप्रिय हो रहे हैं।





























