अब तक 282 ग्राम पंचायतें घोषित हो चुकी हैं बाल विवाह मुक्त, शेष पंचायतों में जनभागीदारी से चलेगा अभियान
रायगढ़। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने के लिए जिला प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। जिले की शेष ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से आगामी 27 नवंबर को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इन सभाओं में बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत घोषित करने का प्रस्ताव रखा जाएगा और नियमानुसार पारित कराया जाएगा। प्रशासन का जोर जनभागीदारी के माध्यम से अभियान को प्रभावी बनाने और बाल विवाह की घटनाओं पर रोक लगाने पर है।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर जिला पंचायत के सभाकक्ष में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें अधिकारियों को बाल विवाह रोकने, संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराने और ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
विशेष ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कराने के निर्देश
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत बबन पठारे ने कार्यशाला में अधिकारियों को निर्देश दिए कि 27 नवंबर को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत घोषित करने का प्रस्ताव अनिवार्य रूप से रखा जाए और नियमानुसार पारित कराया जाए। उन्होंने अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन तथा निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा।
282 ग्राम पंचायतें पहले ही घोषित
जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, अरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि वर्ष 2025-26 में रायगढ़ जिले की 282 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है। अब शेष 268 ग्राम पंचायतों को भी इस सामाजिक कुरीति से मुक्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले की कुल 60 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले से बाल विवाह मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों में भी लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि वहां दोबारा बाल विवाह की घटनाएं न हों।
अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण
कार्यशाला में बाल विकास परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को विभागीय कार्यों के साथ बाल विवाह की रोकथाम से जुड़ी जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई। इसके अलावा, ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के संबंध में भी प्रशिक्षण दिया गया।
जिला प्रशासन का लक्ष्य केवल ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित करना ही नहीं, बल्कि जागरूकता, सतत निगरानी और सामुदायिक सहभागिता के जरिए इस कुप्रथा को रोकना है। विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की भागीदारी सुनिश्चित कर बाल विवाह के खिलाफ अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी है।






























