रायगढ़ में 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का भव्य आगाज, राज्यपाल रमेन डेका ने किया शुभारंभ

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महाराजा चक्रधर सिंह की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर शुरू हुआ 10 दिवसीय कला महोत्सव, बोले- नई पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए सांस्कृतिक विरासत

रायगढ़। संगीत, नृत्य और कला की समृद्ध परंपरा के लिए पहचान रखने वाली रायगढ़ की धरती पर सोमवार को 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल रमेन डेका ने महाराजा चक्रधर सिंह की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।

रामलीला मैदान में 14 से 23 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। समारोह के दौरान गायन, वादन, शास्त्रीय नृत्य और लोककलाओं की विविध प्रस्तुतियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

कला-साधना और विरासत को आगे बढ़ाने का मंच

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि चक्रधर समारोह केवल कलाकारों की प्रस्तुतियों तक सीमित आयोजन नहीं है, बल्कि यह महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसत्ता से अधिक महत्व कला को दिया। उन्होंने कलाकारों को संरक्षण देने के साथ संगीत, नृत्य और साहित्य को समाज से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रायगढ़ घराने की अलग पहचान

राज्यपाल ने कहा कि रायगढ़ भारतीय शास्त्रीय कला परंपरा की महत्वपूर्ण भूमि है। रायगढ़ घराने के कथक ने देश के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

उन्होंने महाराजा चक्रधर सिंह की प्रमुख कृतियों ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ और ‘राग रत्न मंजूषा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ये रचनाएं आज भी कला और साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण धरोहर हैं।

साधना से बनता है कला का तीर्थ

रमेन डेका ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने अपनी साधना के माध्यम से यह संदेश दिया कि कला किसी एक स्थान या केंद्र तक सीमित नहीं होती। जहां निरंतर साधना होती है, वही स्थान कला का तीर्थ बन जाता है।

उन्होंने कहा कि आज रायगढ़ की पहचान संगीत, घुंघरुओं की झंकार, तबले की थाप और नृत्य की भाव-भंगिमाओं से जुड़ी हुई है। चक्रधर समारोह इस पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

स्थानीय कलाकारों को भी मिल रहा बड़ा मंच

राज्यपाल ने कहा कि चक्रधर समारोह अब केवल शासकीय आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और धड़कन बन चुका है। देश के ख्यात कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना इस आयोजन की विशेष उपलब्धि है।

उन्होंने युवाओं से अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहने तथा आधुनिक नवाचार के साथ कला को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ की लोककलाओं का भी होगा प्रदर्शन

राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं आदिवासी कला परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पंथी, राउत नाचा, भरथरी, सुआ और करमा जैसे लोकनृत्य एवं लोकगीत प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता की पहचान हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है और चक्रधर समारोह इसी सांस्कृतिक एकता को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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