बीआरआईसीएस पर पी. चिदंबरम के बयान से गरमाई सियासत, ओपी चौधरी बोले—‘राजनीतिक स्वार्थ में राष्ट्रहित न भूलें’

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रायगढ़ विधायक एवं वित्त मंत्री ने कहा—बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के दौर में भारत के लिए संतुलित कूटनीति जरूरी

रायगढ़। बीआरआईसीएस सम्मेलन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बयान पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित कूटनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।

‘राजनीतिक स्वार्थ के कारण राष्ट्रहित न भूलें’

ओ.पी. चौधरी ने कहा कि पी. चिदंबरम राजनीतिक स्वार्थ के चलते राष्ट्रहित को भूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में पूरी दुनिया का वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और ऐसे समय में भारत के लिए अपनी विदेश नीति को संतुलित रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

‘ब्रिक्स का लाभ नहीं दिखना राजनीतिक दृष्टिहीनता’

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि यदि किसी को मौजूदा परिस्थितियों में ब्रिक्स के महत्व और उसके संभावित लाभ दिखाई नहीं देते हैं, तो यह उनकी राजनीतिक दृष्टिहीनता है। उन्होंने कहा कि भारत को बदलती वैश्विक परिस्थितियों को समझते हुए अपने हितों के अनुरूप सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना होगा।

अमेरिका समेत प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलन जरूरी

ओ.पी. चौधरी ने कहा कि ब्राजील, रूस, भारत और चीन जैसे देश वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र हैं, वहीं अमेरिका भी एक बड़ी वैश्विक शक्ति है। ऐसी स्थिति में भारत यदि इन सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलन बनाकर आगे नहीं बढ़ेगा, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे समय में भारत के लिए जरूरी है कि वह अपनी रणनीतिक और कूटनीतिक स्थिति को मजबूत रखते हुए विभिन्न देशों के साथ संतुलित संबंध कायम रखे।

राष्ट्रीय हित को केंद्र में रखकर नीति बनाने पर जोर

ओ.पी. चौधरी के बयान से स्पष्ट है कि वे बीआरआईसीएस जैसे बहुपक्षीय मंचों को बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत के रणनीतिक हितों से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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