सेठ किरोड़ीमल की समाधि स्थल की बदहाली पर उठे सवाल, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी निशाना

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जिस दानवीर के नाम से रायगढ़ की पहचान, उनकी समाधि की हालत पर नाराजगी

रायगढ़। शहर के विकास और जनहित में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले दानवीर सेठ किरोड़ीमल लुहारीवाला की समाधि स्थल की कथित बदहाली को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि जिस स्थान को श्रद्धा और सम्मान का केंद्र होना चाहिए, वहां वर्तमान में बीमार एवं आवारा कुत्तों को रखने के लिए शेल्टर के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

समाधि स्थल पर कुत्तों के डेरा जमाने का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि समाधि स्थल की उचित देखरेख नहीं होने के कारण वहां आवारा और बीमार कुत्तों का जमावड़ा रहता है। आरोप है कि कई बार कुत्ते समाधि के आसपास और उसके ऊपर तक दिखाई देते हैं। इसे सेठ किरोड़ीमल की स्मृति और विरासत के प्रति असम्मानजनक स्थिति बताते हुए जिम्मेदारों से तत्काल ध्यान देने की मांग उठ रही है।

रायगढ़ के विकास में सेठ किरोड़ीमल का महत्वपूर्ण योगदान

सेठ किरोड़ीमल लुहारीवाला को रायगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले दानवीरों में गिना जाता है। स्थानीय स्तर पर उनके नाम से कई सामाजिक एवं सार्वजनिक निर्माण कार्यों का उल्लेख किया जाता है। सरकारी भवनों, धर्मशालाओं, राइस मिल और दुकानों सहित विभिन्न संपत्तियों को उनकी विरासत से जोड़कर देखा जाता है।

ट्रस्ट की संपत्तियों और आय को लेकर भी उठ रहे सवाल

समाधि स्थल की स्थिति के साथ-साथ सेठ किरोड़ीमल ट्रस्ट की संपत्तियों से होने वाली आय और उनके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि ट्रस्ट की संपत्तियों से होने वाली आमदनी और उसके उपयोग में पारदर्शिता की जरूरत है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता की मांग

आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि सेठ किरोड़ीमल द्वारा समाज और शहर के हित में छोड़ी गई संपत्तियों का उपयोग जनकल्याण तथा उनकी मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए। ट्रस्ट के संचालन, संपत्तियों की स्थिति, आय-व्यय और समाधि स्थल की देखरेख को लेकर पारदर्शी व्यवस्था की मांग भी सामने आ रही है।

विरासत को सम्मान देने की जरूरत

सेठ किरोड़ीमल की स्मृति से जुड़ा समाधि स्थल केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि शहर के इतिहास और सामाजिक विरासत का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में उसकी साफ-सफाई, सुरक्षा और उचित रखरखाव सुनिश्चित करना जरूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रस्ट प्रबंधन को इस मामले में गंभीरता से पहल करते हुए समाधि स्थल की गरिमा बहाल करनी चाहिए।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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