हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, पानी शुल्क विवाद में कंपनी को राहत
रायगढ़। केलो नदी से जल आवंटन को लेकर अंजनी स्टील्स लिमिटेड और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और आर्बिट्रेटर के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी।
2009 के समझौते से शुरू हुआ विवाद
मामला रायगढ़ जिले के उजलपुर स्थित अंजनी स्टील्स लिमिटेड के संयंत्र के लिए केलो नदी के जल आवंटन से जुड़ा है। वर्ष 2009 में राज्य शासन और कंपनी के बीच हुए समझौते के अनुसार कंपनी को प्रतिवर्ष 1.81 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी आवंटित किया गया था।
समझौते में यह भी स्पष्ट किया गया था कि केलो बांध बनने से पहले कंपनी को केवल 0.29 एमसीएम पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि शेष 1.52 एमसीएम पानी की आपूर्ति बांध के निर्माण पूर्ण होने के बाद की जाएगी।
शुल्क को लेकर बढ़ा विवाद
केलो बांध का निर्माण वर्ष 2012 में पूरा हुआ। इससे पहले तक कंपनी गेरवानी नाला से केवल 0.29 एमसीएम पानी का उपयोग कर रही थी। इसके बावजूद केलो परियोजना विभाग ने कंपनी से पूरे 1.81 एमसीएम पानी के आधार पर जल शुल्क की मांग शुरू कर दी।
कंपनी ने इसे अनुबंध की शर्तों के विरुद्ध बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। मामला पहले आर्बिट्रेटर के पास पहुंचा, जहां फैसला कंपनी के पक्ष में आया। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी 18 सितंबर 2025 को आर्बिट्रेटर के निर्णय को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार को नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए SLP खारिज कर दी। इसके साथ ही अंजनी स्टील्स को इस मामले में अंतिम कानूनी राहत मिल गई।















































