घरघोड़ा क्षेत्र में खुलेआम रेत की लूट, कार्रवाई के नाम पर ‘मौन’ क्यों?
रायगढ़। जिले के घरघोड़ा क्षेत्र में बहने वाली कुरुकूट नदी इन दिनों रेत माफियाओं के लिए “सोने की खदान” बन गई है। आरोप है कि शासन-प्रशासन की नजरों के सामने दिनदहाड़े सैकड़ों ट्रैक्टरों से रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
दिनदहाड़े रेत की लूट, बेखौफ माफिया
जहां आमतौर पर अवैध गतिविधियां रात के अंधेरे में होती हैं, वहीं घरघोड़ा में हालात इसके उलट हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुरुकूट नदी से दिन में ही ट्रैक्टरों की लंबी कतारें रेत ढोते देखी जा सकती हैं। इससे साफ है कि रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है।
ग्रामीणों के आरोप: ‘शिकायत पर भी नहीं होती कार्रवाई’
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत के कारण रेत तस्करों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। माइनिंग विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जो कागजों तक सीमित नजर आ रहा है।
पर्यावरण और जल संकट का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित रेत उत्खनन से नदी का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में क्षेत्र को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इससे आसपास के गांवों की जल आपूर्ति और कृषि पर भी असर पड़ने की आशंका है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
जिले में कानून-व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस मामले में जमीनी हकीकत अलग नजर आ रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिम्मेदार विभागों को इन सैकड़ों ट्रैक्टरों की आवाज सुनाई नहीं दे रही, या फिर कार्रवाई जानबूझकर टाली जा रही है?
अब आगे क्या?
कुरुकूट नदी में जारी इस अवैध उत्खनन ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि खबर सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी सख्त कदम उठाते हैं या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।















































