रायपुर। 1 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नूतन वर्ष पर जारी अपने संदेश में वर्ष 2026 को महतारी गौरव वर्ष घोषित करते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। छत्तीसगढ़ी संस्कृति में महतारी मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक है और इसी भावना को आधार बनाकर सरकार ने इस वर्ष को महिलाओं को समर्पित किया है। साय सरकार का मानना है कि यदि महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत नहीं किया गया तो संतुलित विकास संभव नहीं। इसी सोच के साथ वर्ष 2026 को मातृशक्ति की गरिमा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को समर्पित किया गया है।
महतारी गौरव वर्ष
इस विशेष वर्ष के माध्यम से सरकार महिलाओं के सामाजिक योगदान को सम्मान देने, उनकी भूमिका को और मजबूत करने तथा उन्हें निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित कर रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, शिक्षा व स्वास्थ्य सुधारने और सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को अभियान का स्वरूप दिया गया है। मातृशक्ति के प्रति सम्मान को व्यवहार में लाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का यह वर्ष एक बड़ा सामाजिक संकल्प है।
महिला-केंद्रित योजनाओं के प्रभाव को व्यापक बनाने की रणनीति
सरकार ने 2026 को महतारी गौरव वर्ष इसलिए चुना है ताकि 2024 में शुरू हुई महिला-केंद्रित योजनाओं का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचे। विशेष रूप से महतारी वंदन योजना ने महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ाया है। अब इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए eKYC और समय पर भुगतान जैसी डिजिटल व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इसके साथ ही महिलाओं के स्वास्थ्य, डिजिटल साक्षरता, पोषण सुधार, कौशल विकास और सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
महतारी वंदन योजना
मार्च 2024 में शुरू हुई इस योजना के तहत 21 वर्ष से अधिक आयु की विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को हर महीने ₹1000 की सहायता सीधे बैंक खाते में दी जा रही है। लगभग 70 लाख महिलाएं इसका लाभ ले रही हैं। इससे महिलाओं को घर-परिवार के आर्थिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। 2026 में इस योजना को फुल-प्रूफ बनाने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग और भुगतान प्रणाली को मजबूत किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।
मातृशक्ति और सशक्तिकरण को समर्पित बजट
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत बजट ने स्पष्ट किया कि सरकार की विकास नीति के केंद्र में महिलाएं हैं। यह बजट आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि मातृशक्ति की उन्नति का खाका है। छत्तीसगढ़ में 250 महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये सदन महिला संवाद, प्रशिक्षण, परामर्श, सामुदायिक सहयोग और कौशल विकास के केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। इनसे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाएं सशक्तिकरण के नए अवसर प्राप्त करेंगी।

आंगनबाड़ी और पोषण सेवाओं को नई मजबूती
साय सरकार ने बच्चों, किशोरियों और गर्भवती माताओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राज्य बजट में:
• आंगनबाड़ी संचालन हेतु ₹800 करोड़
• पूरक पोषण आहार हेतु ₹650 करोड़
• कुपोषण मुक्ति और पोषण अभियान हेतु ₹235 करोड़
• 500 नए आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण हेतु ₹42 करोड़
इन प्रावधानों से भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा निवेश किया गया है।

18 वर्षीय बालिकाओं को 1.50 लाख की सहायता
साय सरकार ने बेटियों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए बड़ा कदम उठाते हुए पात्र बालिकाओं को 18 वर्ष पूर्ण करने पर ₹1.50 लाख की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य उनकी उच्च शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में उन्हें मजबूत समर्थन देना है।
लखपति दीदी भ्रमण योजना
मुख्यमंत्री लखपति दीदी भ्रमण योजना के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को राज्य और देश के सफल आजीविका मॉडलों का अध्ययन, प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन का अवसर दिया जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता दोनों को इससे नई दिशा मिल रही है।

स्व-सहायता समूहों की सफल कहानियाँ
छत्तीसगढ़ की महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत आर्थिक परिवर्तन की मिसाल बन रही हैं। ये उदाहरण बताते हैं कि साय सरकार की नीतियाँ वास्तव में जमीनी स्तर पर बदलाव ला रही हैं-
• सावित्री उरांव (कोरबा): कपड़ा व्यवसाय से आर्थिक रूप से मजबूत होकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं।

• पूनम देवी (जशपुर): पहले मजदूरी पर निर्भर थीं, अब मछली पालन, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं।

• बृहस्पति धुर्वे (GPM जिला): मशरूम उत्पादन और सब्जी-भाजी खेती से डेढ़ से दो लाख रुपये वार्षिक आय तक पहुंची हैं।

• स्वच्छता दीदियां (कोरिया जिला): ग्रामीण घर-घर जाकर कचरा संग्रहण और स्वच्छता जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

स्वास्थ्य, जागरूकता और डिजिटल साक्षरता
राज्यभर में स्वास्थ्य शिविर, महिला जागरूकता अभियान, पोषण गतिविधियां और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। महिलाओं को सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और ऑनलाइन सुविधाओं की जानकारी देकर उन्हें आधुनिक व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण पर आधारित राज्य का भविष्य
महतारी गौरव वर्ष 2026 छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सबसे बड़ा और प्रभावी अभियान बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि समाज में नई पहचान भी बना रही हैं। यह वर्ष सरकार के उस संकल्प का प्रमाण है कि राज्य का भविष्य महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण पर ही आधारित होगा।















































