छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज का दिन प्रतीकात्मक रूप से बेहद खास रहा। छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा में बैठे 120 चेहरे सिर्फ आगंतुक नहीं थे, बल्कि बदलाव की कहानी थे।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज का दिन प्रतीकात्मक रूप से बेहद खास रहा। छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा में बैठे 120 चेहरे सिर्फ आगंतुक नहीं थे, बल्कि बदलाव की कहानी थे। ये वे पूर्व नक्सली थे जिन्होंने कभी माओवादी विचारधारा के साथ हथियार उठाए थे, लेकिन अब पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को करीब से देख रहे हैं।
अगली सुबह कड़ी सुरक्षा जांच के बाद सभी को विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बैठाया गया। पहली बार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को इतने करीब से देख रहे इन लोगों के चेहरों पर उत्सुकता साफ झलक रही थी। सदन की बहस, प्रश्नकाल और विधायी प्रक्रिया को देखते हुए वे उस व्यवस्था का हिस्सा महसूस कर रहे थे, जिसके खिलाफ वे कभी खड़े थे।
पुनर्वास नीति की दिशा में बड़ा संकेत
सरकार के अनुसार अब तक 2937 नक्सली पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौट चुके हैं। वर्ष 2025 की नई नीति में इनाम राशि, कौशल प्रशिक्षण, जमीन, आवास और रोजगार के प्रावधान जोड़े गए हैं। सात पुनर्वास केंद्रों में 1700 से अधिक लोग प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।














































